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सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को कंटेंट निर्माताओं के साथ राजस्व साझा करने की आवश्यकता: मंत्री

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को पत्रकारों और कंटेंट निर्माताओं के साथ राजस्व साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफार्मों पर सामग्री बनाने वाले लोग उचित हिस्सेदारी के हकदार हैं। इसके साथ ही, नए नियमों के तहत एआई द्वारा निर्मित सामग्री को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा। जानें इस विषय में और क्या कहा गया है और नए नियमों का क्या प्रभाव होगा।
 

सोशल मीडिया पर राजस्व वितरण की आवश्यकता


नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को पत्रकारों, पारंपरिक मीडिया संस्थानों, इन्फ्लुएंसर्स और शोधकर्ताओं के साथ अपनी कमाई का उचित हिस्सा साझा करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि कंटेंट बनाने वाले, चाहे वे समाचार पेशेवर हों या दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने वाले क्रिएटर्स, डिजिटल प्लेटफार्मों पर उत्पन्न राजस्व में एक उचित हिस्सेदारी के हकदार हैं।


मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल इकोसिस्टम में 'फेयर रेवेन्यू डिस्ट्रीब्यूशन' का सिद्धांत स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'सोशल मीडिया प्लेटफार्म उन कंटेंट से काफी लाभ कमाते हैं जिन्हें व्यक्तियों और संगठनों द्वारा अपलोड किया जाता है। ऐसे में कंटेंट बनाने वालों को उनका सही हक मिलना चाहिए।' उनके अनुसार, राजस्व वितरण में निष्पक्षता सुनिश्चित करने से भारत की डिजिटल कंटेंट इकोनॉमी को नई मजबूती मिलेगी।


डीपफेक और एआई सामग्री पर सख्त नियम

यह बयान उस समय आया है जब सरकार डिजिटल प्लेटफार्मों की जवाबदेही और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए नियमों को सख्त कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आईटी नियम, 2021 में नए संशोधनों का प्रस्ताव दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य डीपफेक और एआई द्वारा फैलाए जाने वाले भ्रामक प्रचार पर नियंत्रण लगाना है।


नए नियमों से जवाबदेही का निर्धारण

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को 'सिंथेटिकली जेनरेटेड कंटेंट' (एआई द्वारा निर्मित) को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, ऐसी सामग्री में स्थायी 'मेटाडेटा' या पहचानकर्ता शामिल करने होंगे जिन्हें बदला या हटाया नहीं जा सकेगा। 50 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले बड़े प्लेटफार्मों जैसे फेसबुक, यूट्यूब और स्नैपचैट को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई सामग्री प्रमुखता से चिह्नित हो।


नियमों के अनुसार, वीडियो या फोटो में यह पहचानकर्ता विजुअल डिस्प्ले के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से को कवर करना चाहिए। वहीं, ऑडियो कंटेंट में इसकी शुरुआत की 10 प्रतिशत अवधि में पहचानकर्ता का होना अनिवार्य है। यदि कोई प्लेटफार्म जानबूझकर बिना लेबल वाली एआई सामग्री को अनुमति देता है, तो इसे आईटी अधिनियम के तहत 'उचित तत्परता' बरतने में विफलता माना जाएगा।