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World Lupus Day: महिलाओं में ल्यूपस के लक्षण और सावधानियां

आज विश्व ल्यूपस दिवस पर, जानें इस ऑटोइम्यून बीमारी के लक्षण और महिलाओं में इसके बढ़ने का खतरा। समय पर पहचान से उपचार को सरल बनाया जा सकता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और क्यों महिलाएं इस बीमारी से अधिक प्रभावित होती हैं।
 

ल्यूपस के बारे में जानकारी

आज विश्व ल्यूपस दिवस मनाया जा रहा है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो विशेष रूप से महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है। इस बीमारी का खतरा महिलाओं में अधिक होता है, लेकिन इसके बारे में जागरूकता की कमी है। यदि समय पर इसके लक्षणों पर ध्यान दिया जाए, तो इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। सही समय पर पहचान करने से उपचार आसान हो जाता है।


ल्यूपस के शुरुआती लक्षण

ल्यूपस के इन शुरुआती संकेतों पर जरूर दें ध्यान


- शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक है। यदि इसे नजरअंदाज किया गया, तो यह किडनी, हृदय और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकता है।


- जोड़ों में दर्द, विशेषकर उंगलियों, कलाई और घुटनों के आसपास सूजन, ल्यूपस का संकेत हो सकता है।


- ल्यूपस आर्थराइटिस जोड़ों में विकृति नहीं लाता। यह न तो रुमेटीइड है और न ही ऑस्टियोआर्थराइटिस।


- चेहरे पर लाल रैशेज, विशेषकर नाक और गालों पर बटरफ्लाई रैश, इसके प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं।


- ये रैशेज हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी हो सकते हैं और सूरज की रोशनी में अधिक परेशानी देते हैं।


- यदि आपके बाल तेजी से झड़ रहे हैं और स्कैल्प पर रैशेज हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। ओरल अल्सर, बुखार, वजन में कमी और गर्दन के पास लिम्फ नोड्स में सूजन भी इस बीमारी के संकेत हैं।


- उंगलियों और नाखूनों के आसपास की त्वचा का रंग बदलना, उच्च रक्तचाप और सूजन पर ध्यान देना जरूरी है।


महिलाओं में ल्यूपस का खतरा

अनुसंधान के अनुसार, ल्यूपस महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है। यह समस्या टीनएज से लेकर 30 साल तक की महिलाओं में अधिक होती है। महिलाओं में एस्ट्रोजन का स्तर प्रजनन वर्षों में अधिक होता है, जिससे इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है। इसके अलावा, गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान हार्मोनल असंतुलन भी एक कारण हो सकता है। जेनेटिक कारण भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।