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अंडे और कच्ची सब्जियों का अनोखा संयोजन: एंटीऑक्सीडेंट अवशोषण में वृद्धि

क्या आप जानते हैं कि अंडे और कच्ची सब्जियों का संयोजन आपके शरीर में एंटीऑक्सीडेंट अवशोषण को 8.4 गुना तक बढ़ा सकता है? हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे अंडे की जर्दी में मौजूद लिपिड और फॉस्फोलिपिड्स कैरोटीनॉयड के अवशोषण को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, हम इस अध्ययन के परिणामों और वैज्ञानिक तथ्यों पर भी चर्चा करेंगे।
 

सर्वश्रेष्ठ खाद्य संयोजन

एंटीऑक्सीडेंट हमारे शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि ये कोशिकाओं को हानिकारक प्रभावों से बचाते हैं। विटामिन ई, बीटा-कैरोटीन और विटामिन सी जैसे तत्व एंटीऑक्सीडेंट के उदाहरण हैं। क्या आप जानते हैं कि अंडे और कच्ची सब्जियों का संयोजन एंटीऑक्सीडेंट के अवशोषण को 8.4 गुना तक बढ़ा सकता है? यह इसलिए संभव है क्योंकि कैरोटीनॉयड, जो कि फैट में घुलनशील होते हैं, अंडे की जर्दी में मौजूद लिपिड और फॉस्फोलिपिड्स के साथ मिलकर बेहतर अवशोषण में मदद करते हैं।


विज्ञान और अध्ययन के परिणाम

पर्ड्यू यूनिवर्सिटी का अध्ययन

किम और उनके सहयोगियों द्वारा 'द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन' में प्रकाशित एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने 16 स्वस्थ व्यक्तियों पर परीक्षण किया। इन व्यक्तियों ने कच्चे मिक्स-वेजिटेबल सलाद को बिना अंडे के और 1.5 या 3 पके हुए अंडों के साथ खाया।


अवशोषण में 8.4 गुना बढ़ोतरी

अवशोषण में वृद्धि

बिना अंडे वाली सलाद की तुलना में, तीन पके हुए अंडों के साथ सलाद खाने से कुल कैरोटीनॉयड अवशोषण में 3 से 8 गुना (कुल मिलाकर 8.4 गुना) की वृद्धि हुई।


खास एंटीऑक्सीडेंट

मुख्य फाइटोन्यूट्रिएंट्स

इस अवशोषण में अल्फा-कैरोटीन, बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन, ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे महत्वपूर्ण फाइटोन्यूट्रिएंट्स शामिल थे।


खुराक की सीमा

अंडों की मात्रा

1.5 अंडे खाने पर बहुत कम अवशोषण देखा गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अधिक न्यूट्रिशनल तालमेल (synergy) प्राप्त करने के लिए अंडों की अधिक मात्रा आवश्यक है।


यह तालमेल क्यों काम करता है?

फैट में घुलनशीलता

कैरोटीनॉयड पानी में नहीं घुलते और इन्हें पाचन तंत्र से गुजरने के लिए खाने में मौजूद फैट की आवश्यकता होती है।


फॉस्फोलिपिड का योगदान

अंडे की जर्दी में विशेष फॉस्फोलिपिड्स होते हैं, जो माइसेलाइजेशन को बढ़ाते हैं। यह प्रक्रिया पोषक तत्वों को छोटे कणों में पैक करती है, जिन्हें शरीर आसानी से अवशोषित कर सकता है।