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अल्का याग्निक की स्वास्थ्य स्थिति: सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस के बारे में जानें

अल्का याग्निक, प्रसिद्ध हिंदी गायिका, को हाल ही में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर फैंस चिंतित हैं, क्योंकि वह सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस से ग्रसित हैं। इस लेख में हम उनकी बीमारी, इसके लक्षण, जोखिम कारक और उपचार के उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे। जानें कि यह स्थिति कैसे विकसित होती है और इससे बचाव के क्या तरीके हैं।
 

अल्का याग्निक को मिला पद्म भूषण पुरस्कार

प्रसिद्ध हिंदी गायिका अल्का याग्निक को हाल ही में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनकी पुरस्कार ग्रहण करते समय की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं। 60 वर्षीय गायिका की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर फैंस चिंतित हैं, क्योंकि वह काफी कमजोर नजर आ रही हैं। पुरस्कार लेने के बाद, अल्का ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई हैं और अपनी व्यक्तिगत जिंदगी के बारे में भी कुछ नहीं बताया है। उन्होंने कहा, "आप में से कुछ लोग मेरी बीमारी के बारे में जानते हैं। मैं पिछले दो साल से कठिन दौर से गुजर रही हूं। आप सभी का प्यार और समर्थन हमेशा मेरे साथ रहा है।"


सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस क्या है?

अल्का याग्निक ने 2024 में एक पोस्ट में बताया था कि उन्हें सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस हुआ है, जिससे उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। यह स्थिति एक वायरल संक्रमण के कारण उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि वह इस स्थिति के लिए तैयार नहीं थीं और एक बार जब वह फ्लाइट से बाहर निकल रही थीं, तभी अचानक उन्हें सुनाई देना बंद हो गया।


सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस की विशेषताएँ


यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की सुनने की क्षमता अचानक समाप्त हो जाती है। यह तब होता है जब कान के अंदरूनी हिस्से, कोक्लीअ और ऑडिटरी नर्व प्रभावित होते हैं। जब ये हेयर और नर्व सेल्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो वे खुद से ठीक नहीं हो सकते। इसके लिए ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श करना आवश्यक है। यह समस्या एक या दोनों कानों में हो सकती है और यह अचानक या धीरे-धीरे विकसित हो सकती है.


लक्षण और जोखिम कारक

लक्षण:
समझने में कठिनाई, बार-बार बातचीत को दोहराने की आवश्यकता, फोन, टीवी और रेडियो की आवाज बढ़ाने की जरूरत, कान में रिंगिंग या बज्जिंग की आवाज, लंबे समय तक गाने सुनने पर कानों में थकान।


किसे खतरा है?


यह बीमारी विशेष रूप से बुजुर्गों में होती है। तेज आवाज वाले स्थानों पर हेडफोन का उपयोग, परिवार में बहरेपन का इतिहास, कान में संक्रमण या वायरल संक्रमण, सिर में चोट, और डायबिटीज या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से ग्रसित लोग इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।


इलाज और बचाव के उपाय

सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस एक स्थायी समस्या है, जिसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ उपचारों से स्थिति में सुधार किया जा सकता है। कान में लगाने वाली मशीनों की मदद से ध्वनियों को समझना आसान हो जाता है। जिनकी सुनने की क्षमता बहुत कम हो गई है, उन्हें कॉक्लियर इम्प्लांट की सलाह दी जाती है। यदि सुनने की क्षमता अचानक कम हो गई है, तो दवाइयां दी जा सकती हैं। इसके अलावा, स्पीच थेरेपी और ऑडिटरी रिहैबिलिटेशन भी सहायक होते हैं।



  • कानों की सुरक्षा के लिए लंबे समय तक हेडफोन का उपयोग न करें।

  • शोर वाले स्थानों पर ईयरप्लग का उपयोग करें।

  • हेडफोन की आवाज को सुरक्षित स्तर पर रखें।

  • बुजुर्गों और उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों को नियमित रूप से सुनने की जांच करानी चाहिए।