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असमय सफेद बालों का आयुर्वेदिक उपचार: जानें कारण और उपाय

पंचकूला के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के विशेषज्ञों ने युवाओं में असमय सफेद बालों और हेयरफॉल की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई है। बदलती जीवनशैली और तनाव के कारण यह समस्या बढ़ रही है। आयुर्वेद में इसे 'पालित्य' कहा जाता है। जानें इसके लक्षण, कारण और रोकथाम के लिए आयुर्वेदिक उपाय। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना और सही तेलों का उपयोग करना आवश्यक है।
 

असमय सफेद बालों की समस्या

असमय सफेद बालों का आयुर्वेदिक उपचार: पंचकूला में स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के विशेषज्ञों ने युवाओं में तेजी से बढ़ते हेयरफॉल और असमय सफेद बालों के मामलों पर चिंता व्यक्त की है। बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव और फास्ट फूड का बढ़ता सेवन न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि बालों की स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। ट्राइसिटी (पंचकूला, चंडीगढ़ और मोहाली) के युवाओं में स्टाइलिश दिखने की चाह में कॉस्मेटिक उत्पादों का अत्यधिक उपयोग इस समस्या को और बढ़ा रहा है।


आयुर्वेद में असमय सफेद बालों की स्थिति को 'पालित्य' कहा जाता है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत, संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में इस समस्या पर चिकित्सा सलाह दी जा रही है।


पालित्य के लक्षण और कारण

पालित्य के मुख्य लक्षण और कारण: राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के सहायक आचार्य डॉ. मनीष पमनानी के अनुसार, बालों का असमय सफेद होना केवल उम्र का प्रभाव नहीं है, बल्कि यह अंदरूनी स्वास्थ्य समस्याओं और पोषण की कमी का संकेत भी हो सकता है। शरीर में विटामिन-बी12 और विटामिन-डी की कमी, पेट में अत्यधिक गर्मी, मसालेदार भोजन और चाय-कॉफी की अधिकता से पित्त दोष बढ़ता है, जो बालों को जल्दी पकाता है।


इसके अतिरिक्त, बार-बार सर्दी-जुकाम, मलेरिया जैसी बीमारियों के बाद कमजोरी और दिल की कमजोरी भी बालों के झड़ने और पकने की गति को बढ़ा देती है। मुंह में बार-बार छाले, पिंडलियों में दर्द, सिर की त्वचा पर सूखापन और अंगों में झनझनाहट भी पालित्य के प्रमुख लक्षण हैं।


वात और पित्त दोष का असंतुलन

वात और पित्त दोष का असंतुलन: आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से वात और पित्त दोषों के असंतुलन के कारण होती है। सिर की त्वचा में वात दोष बढ़ने से सूखापन और फुंसियां उत्पन्न होती हैं, जबकि बढ़ा हुआ पित्त और दूषित रक्त बालों को समय से पहले सफेद बना देते हैं। हानिकारक कॉस्मेटिक उत्पादों का बार-बार उपयोग इस प्रक्रिया को और तेज कर देता है।


पंचकूला संस्थान के डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व और द्रव्य गुण विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रवि राव एस के निर्देशन में ओपीडी संख्या-110 में विशेष व्यवस्था की गई है। यहां हर बुधवार और शनिवार को विशेषज्ञ चिकित्सक बालों से संबंधित बीमारियों की गहन जांच कर रहे हैं।


रोकथाम के लिए आयुर्वेदिक उपाय

रोकथाम के लिए जरूरी आयुर्वेदिक उपाय: पालित्य की रोकथाम के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है। इसके लिए गिलोय, अश्वगंधा और विभीतकी का नियमित सेवन लाभकारी माना जाता है।


बाहरी पोषण के लिए भृंगराज तेल, ब्राह्मी तेल, नीलीभृंगादि तेल, नीम तेल और शुद्ध तिल के तेल से सिर की मालिश की जा सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी औषधि का सेवन शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। #HairCare #AyurvedaTips #HealthNews #Panchkula