इंग्लैंड में टीबी से मौतों का चिंताजनक आंकड़ा: हर सप्ताह एक व्यक्ति की जान जाती है
टीबी से मौतों का नया अध्ययन
लंदन: इंग्लैंड में तपेदिक (टीबी) से होने वाली मौतों के बारे में एक नया अध्ययन सामने आया है। इस शोध के अनुसार, हर सप्ताह एक व्यक्ति की टीबी का समय पर पता न चल पाने के कारण मृत्यु हो जाती है। ऐसे मामलों में बीमारी का पता केवल मृत्यु के बाद ही चलता है, जिससे मरीज को उपचार का अवसर नहीं मिल पाता।
यह अध्ययन जर्नल थोरेक्स में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने बताया कि ब्रिटेन में जन्मे और अधिक उम्र के पुरुषों में मृत्यु के बाद टीबी की पहचान की गई है। यह दर्शाता है कि स्वास्थ्यकर्मी इन मरीजों में टीबी की संभावनाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मृत्यु के बाद टीबी का पता चलना एक 'नेवर इवेंट' होना चाहिए, यानी ऐसी घटना जो किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए और इसकी तुरंत जांच होनी चाहिए। इसे 'निदान में सबसे बड़ी देरी' के रूप में देखा गया है।
इंग्लैंड में टीबी के मामलों की दर पिछले एक दशक में सबसे अधिक हो गई है। वर्ष 2024 में प्रति एक लाख जनसंख्या पर 9.4 मामले दर्ज किए गए, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के 'कम संक्रमण वाले देश' की सीमा के करीब है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंग्लैंड में टीबी के अधिकांश मरीज विदेश में जन्मे होते हैं, जिनकी औसत आयु 36 वर्ष होती है। हालांकि, इस अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में मृत्यु के बाद टीबी की पहचान हुई, वे ज्यादातर ब्रिटेन में जन्मे और अधिक उम्र के थे।
अध्ययन की सह-लेखिका, डॉ. एलेनोर मॉर्गन ने कहा, 'जब टीबी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, तो हमें हर मरीज से यह सवाल पूछना चाहिए कि 'क्या यह टीबी हो सकती है?' भले ही वह सामान्य जोखिम वाले समूह में न आता हो।'
अध्ययन में यह भी पाया गया कि मृत्यु के बाद टीबी की पहचान उन लोगों में अधिक हुई जो लंदन के बाहर रहते थे और जिनका शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करने का इतिहास था।
चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में भी टीबी का जोखिम अधिक पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका कारण उनका अपरिपक्व प्रतिरक्षा तंत्र और सामान्य जैसे दिखने वाले लक्षण हो सकते हैं।
टीबी आज भी दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है। वर्ष 2024 में लगभग 12.3 लाख लोगों की मौत टीबी से हुई, जबकि 1.07 करोड़ लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए।
हालांकि, टीबी एक रोकथाम योग्य और पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है। विशेष एंटीबायोटिक दवाओं से इसका उपचार संभव है, और हाल के वर्षों में नई दवाओं की मदद से दवा-प्रतिरोधी टीबी के इलाज की अवधि भी कम हुई है।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक, डॉ. टॉम विंगफील्ड ने कहा कि जिस तरह से एमआरएसए या क्लॉस्ट्रिडियोइड्स डिफिसाइल जैसे सुपरबग से होने वाली मौतों की नियमित जांच होती है, उसी तरह टीबी से जुड़ी हर मौत की भी गहन जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी मौतों को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में टीबी के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं, क्योंकि बीमारी का देर से पता चलने से मरीज की स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीबी का सफल इलाज संभव है।