किडनी खराबी के संकेत: पैरों में सूजन और त्वचा के रंग में बदलाव
किडनी स्वास्थ्य के संकेत
नई दिल्ली: जब हमारा शरीर किसी संक्रमण का सामना करता है, तो वह हमें इसके बारे में संकेत देता है। किडनी की खराबी अक्सर चुपचाप शुरू होती है, लेकिन इसके प्रभाव शरीर के अन्य हिस्सों में भी दिखाई देने लगते हैं। पैरों पर ध्यान देने से कई प्रारंभिक लक्षण उभर सकते हैं। आमतौर पर लोग इन संकेतों को थकान, मौसम या उम्र से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं।
कई बार, पैर केवल चलने का हिस्सा नहीं होते, बल्कि ये हमारे अंदरूनी स्वास्थ्य का संकेतक बन जाते हैं। यदि पैरों में सूजन, झुनझुनी या त्वचा का रंग बदलता है, तो इसे सामान्य नहीं समझना चाहिए, खासकर जब यह लगातार बना रहे। ये लक्षण शरीर में तरल पदार्थ की वृद्धि, रक्त प्रवाह में परिवर्तन और नसों पर दबाव का संकेत हो सकते हैं।
पैरों में सूजन का अर्थ
जब किडनी कमजोर होती है, तो शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर नहीं निकल पाता, जिससे पैरों और टखनों में सूजन होती है। सुबह के समय सूजन कम और शाम को अधिक महसूस होना एक सामान्य संकेत है। यदि जूते अचानक तंग लगने लगें या उंगली से दबाने पर त्वचा पर गड्ढा बन जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह एडिमा का संकेत हो सकता है, जो किडनी खराबी के प्रारंभिक चरण में दिखाई देता है। लगातार सूजन होने पर डॉक्टर से जांच कराना आवश्यक है।
त्वचा के रंग में बदलाव
यदि रक्त साफ नहीं होता है, तो त्वचा का रंग बदल सकता है। पैरों की त्वचा सामान्य से अधिक फीकी, पीली या कहीं-कहीं गहरी दिख सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किडनी विषाक्त पदार्थों और अपशिष्ट को बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे रक्त में अशुद्धियों की मात्रा बढ़ जाती है। कभी-कभी त्वचा रूखी और पपड़ीदार भी हो सकती है। ऐसे बदलावों को सर्दी या कॉस्मेटिक समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐंठन और सुन्नपन
किडनी की खराबी नसों पर भी असर डालती है। रक्त में यूरिया और अन्य अपशिष्ट की वृद्धि से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। यदि पैरों में बार-बार ऐंठन, झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है, तो यह न्यूरोपैथी का संकेत हो सकता है। यह समस्या विशेष रूप से रात में अधिक होती है। कई मरीजों का कहना है कि पैरों में बिजली जैसी झनझनाहट होती है। समय पर इलाज से नसों को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।
घाव का धीरे भरना
यदि पैर में कोई छोटा घाव, कट या छाला सामान्य से अधिक समय ले रहा है, तो यह कमजोर किडनी और खराब रक्त संचार का संकेत हो सकता है। किडनी की खराबी में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे घाव जल्दी नहीं भरते। संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। डायबिटीज वाले मरीजों में यह संकेत और गंभीर हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टर से कब मिलें?
यदि सूजन, त्वचा में बदलाव, सुन्नपन, ऐंठन या घाव का धीरे भरना 1-2 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो जांच कराना आवश्यक है। डॉक्टर आमतौर पर यूरिन टेस्ट, क्रिएटिनिन, जीएफआर और इलेक्ट्रोलाइट जांच कराते हैं। प्रारंभिक पहचान से इलाज आसान होता है। विशेषज्ञ नमक कम करने, पानी का संतुलन बनाए रखने, रक्तचाप को नियंत्रित रखने और बिना सलाह के दर्द निवारक दवाओं का सेवन न करने की सलाह देते हैं। नियमित जांच और सही जीवनशैली किडनी की सेहत को बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।