क्या अंतरिक्ष में बढ़ती है एस्ट्रोनॉट्स की हाइट?
हाइट में बदलाव का विज्ञान
क्या आप जानते हैं कि आपकी लंबाई दिनभर में बदलती रहती है? अधिकांश लोग मानते हैं कि उनकी हाइट स्थिर रहती है, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, ग्रैविटी के प्रभाव से हम दिन में 1-2 सेंटीमीटर तक छोटे हो जाते हैं। आइए समझते हैं कि अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स की लंबाई कैसे बढ़ जाती है।
सुबह की लंबाई और अंतरिक्ष में बदलाव
नासा के अनुसार, सुबह उठने पर हम सबसे लंबे होते हैं, क्योंकि रातभर लेटने से हमारी रीढ़ की हड्डी फैल जाती है। लेकिन अंतरिक्ष में यह परिवर्तन और भी अधिक होता है।
माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव
नासा के अध्ययन के अनुसार, माइक्रोग्रैविटी में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट औसतन 3 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, खासकर पहले 3-4 दिनों में। यह वृद्धि मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी में होती है।
ग्रैविटी का दबाव
धरती पर ग्रैविटी रीढ़ की डिस्क्स को दबाती रहती है, जबकि अंतरिक्ष में ऐसा कोई दबाव नहीं होता, जिससे डिस्क्स फैल जाती हैं। इससे हाइट, बैठने की स्थिति और कंधों की स्थिति प्रभावित होती है।
केट रूबिन्स का अनुभव
नासा ने बताया कि एस्ट्रोनॉट केट रूबिन्स, जो मिशन एक्स का हिस्सा थीं, उनकी 'अर्थ हाइट' 171 सेमी थी, जो अंतरिक्ष में बढ़कर 174.4 सेमी हो गई। जब वह धरती पर लौटीं, तो ग्रैविटी के प्रभाव से उनकी हाइट फिर से पहले जैसी हो गई।
शारीरिक बदलावों की समझ
नासा के ह्यूमन रिसर्च प्रोग्राम में एस्ट्रोनॉट माइक बैरेट और प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर सुधाकर राजुलु ने एक वीडियो में बताया कि अंतरिक्ष में शरीर कैसे बदलता है। इस बदलाव को समझने के लिए नासा ने 'व्हाट योर स्पेस हाइट?' नाम की एक मजेदार गतिविधि शुरू की थी।
एंथ्रोपोमेट्री और डिजाइन
यह गतिविधि एंथ्रोपोमेट्री से जुड़ी है, जिसमें नासा की टीम एस्ट्रोनॉट्स के माप लेकर स्पेसक्राफ्ट, स्पेस सूट और अन्य डिजाइन तय करती है। अंतरिक्ष में हाइट बढ़ने से कंधे ऊंचे हो जाते हैं, जिससे ऊंची चीजों तक पहुंचना आसान हो जाता है।
स्पेसक्राफ्ट में एडजस्टमेंट
एस्ट्रोनॉट्स स्पेस में काम करते समय अपने पैरों को फर्श के स्टैंड में फंसाकर खुद को संभालते हैं। स्पेसक्राफ्ट में कई फीचर्स एडजस्टेबल होते हैं, क्योंकि लॉन्च और वापसी के समय हाइट अलग-अलग होती है।