क्या आप भी शरीर की प्राकृतिक क्रियाओं को रोकते हैं? जानें इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव
नई दिल्ली में स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी
नई दिल्ली: आजकल कई लोग दूसरों के सामने स्मार्ट या शिष्ट दिखने के लिए गैस, डकार, छींक, उबासी जैसी शरीर की प्राकृतिक क्रियाओं को रोक लेते हैं. शुरुआत में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन अगर यह आदत रोज की बन जाए तो इसका बुरा असर सेहत पर पड़ सकता है, आयुर्वेद के अनुसार, शरीर जब भूख, प्यास, नींद, पेशाब या शौच जैसी किसी जरूरत का संकेत देता है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इन जरूरतों को बार-बार रोकने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है और कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
यूरिन और मल को बार-बार रोकना सही नहीं
कई लोग काम की व्यस्तता, यात्रा या साफ टॉयलेट न मिलने की वजह से लंबे समय तक पेशाब या मल रोककर रखते हैं. लेकिन ऐसा करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। बार-बार पेशाब रोकने से ब्लैडर और किडनी से जुड़ी परेशानियों का खतरा भी बढ़ सकता है.
गैस और डकार रोकने की आदत
अक्सर लोग पब्लिक प्लेस पर गैस या डकार आने पर उसे रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन ऐसा बार-बार करना ठीक नहीं है, इससे पेट फूलना, पेट दर्द, सीने में जलन और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
छींक और उबासी को बार-बार न रोकें
मीटिंग या लोगों के बीच होने पर कई लोग छींक या उबासी रोकने की कोशिश करते हैं. लेकिन ये शरीर की प्राकृतिक क्रियाएं हैं, इन्हें बार-बार रोकने से सिर, गर्दन और चेहरे में तनाव या असहजता महसूस हो सकती है.
भूख और प्यास को नजरअंदाज न करें
काम की व्यस्तता में कई लोग समय पर खाना नहीं खाते या पानी पीना टाल देते हैं लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से शरीर कमजोर हो सकता है, चक्कर आ सकते हैं और थकान महसूस हो सकती है.
आंसुओं को हमेशा न दबाएं
अक्सर लोगों को लगता है कि रोना कमजोरी की निशानी है, इसलिए वे अपनी भावनाओं को दबाकर रखते हैं. लेकिन हर बार अपनी फीलिंग्स को रोकना सही नहीं है, ऐसा करने से तनाव बढ़ सकता है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है.
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