क्या बच्चों में भी हो सकता है हार्ट अटैक? जानें जोखिम और लक्षण
बच्चों में दिल की बीमारियों का बढ़ता खतरा
दुनिया भर में हृदय रोग एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। पिछले दशक के आंकड़ों के अनुसार, इन बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, और अब युवा और किशोर भी इसका शिकार बन रहे हैं। हार्ट अटैक और इससे होने वाली मौतों की घटनाएं अब किशोरों में भी देखने को मिल रही हैं। इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या 10 साल से कम उम्र के बच्चे भी हार्ट अटैक का शिकार हो सकते हैं।
कम उम्र में हार्ट अटैक के कारण
पहले माना जाता था कि हाई कोलेस्ट्रॉल, उम्र और पुरानी बीमारियाँ हार्ट अटैक के मुख्य कारण हैं। लेकिन हाल के अध्ययनों से पता चला है कि अस्वस्थ खानपान, बदलती जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी कम उम्र में दिल की समस्याओं का कारण बन रही हैं।
असंतुलित आहार, जिसमें अधिक नमक, प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट और चीनी शामिल हैं, धमनियों में वसा जमा कर सकते हैं, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।
इसके अलावा, शारीरिक गतिविधियों की कमी, लंबे समय तक बैठे रहना, उच्च रक्तचाप, मोटापा और इंसुलिन प्रतिरोध जैसी स्थितियाँ भी हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा देती हैं।
क्या 10 साल से कम उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा है?
आम तौर पर, 1 से 3 साल के बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा बहुत कम होता है और ऐसे मामले काफी दुर्लभ होते हैं। हालांकि, कुछ बच्चों में आनुवांशिक हृदय रोग या कावासाकी बीमारी जैसी समस्याओं के कारण दिल की जटिलताओं का खतरा हो सकता है।
ऐसे बच्चों में अत्यधिक थकान, तेज सांस लेना, चिड़चिड़ापन और दिल की धड़कनों में अनियमितता जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बच्चों में हार्ट अटैक के लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा वयस्कों की तुलना में बहुत कम होता है। लेकिन जन्मजात हृदय रोग या कावासाकी जैसी बीमारियों के कारण रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है।
यदि आपके बच्चे में जन्मजात हृदय रोग है, तो कुछ लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक है। जैसे कि चलने-दौड़ने में परेशानी, सीने में दर्द, बिना कारण बेहोशी आना, सांस लेने में कठिनाई, और दिल की धड़कन का अनियमित होना।
बच्चों में उच्च रक्तचाप का खतरा
बच्चों में बढ़ती दिल की बीमारियों के लिए उच्च रक्तचाप एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। पिछले दो दशकों में किशोरों और बच्चों में उच्च रक्तचाप के मामले दोगुने हो गए हैं।
साल 2000 में यह 3.2% से बढ़कर 2020 में 6% से अधिक हो गया है। यदि इस समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह हृदय रोगों और किडनी से संबंधित बीमारियों का कारण बन सकता है।