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क्या बदल रही हैं भारतीय शादियों की परिभाषा? एक्स्ट्रामैरिटल डेटिंग ऐप्स का बढ़ता प्रभाव

भारत में शादियों की परंपरा अब एक नए मोड़ पर है, जहां एक्स्ट्रामैरिटल डेटिंग ऐप्स की बढ़ती लोकप्रियता ने महिलाओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की है। Gleeden जैसे प्लेटफार्मों पर महिलाओं के साइन-अप में 148% की वृद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि वे अब अपनी भावनात्मक जरूरतों के लिए सक्रिय रूप से निर्णय ले रही हैं। इस लेख में जानें कि कैसे समय की कमी, भावनात्मक जुड़ाव की कमी और जेंडर स्टीरियोटाइप का टूटना इस बदलाव के पीछे के कारण हैं।
 

भारत में शादियों का नया चेहरा


नई दिल्ली: भारत में विवाह समारोह अब भी एक बड़े उत्सव के रूप में मनाए जाते हैं, लेकिन एक एक्स्ट्रामैरिटल डेटिंग ऐप के आंकड़े इस परंपरा को चुनौती दे रहे हैं। Gleeden नामक इस प्लेटफॉर्म ने हाल ही में 40 लाख से अधिक यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है, जिसमें महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।


महिलाओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि

इस ऐप के आंकड़ों के अनुसार, कुल यूजर्स में पुरुषों का हिस्सा 65% है, जबकि महिलाओं का 35% है। लेकिन पिछले दो वर्षों में महिलाओं के साइन-अप में 148% की वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि महिलाएं अब अपनी खुशी और भावनात्मक आवश्यकताओं के लिए सक्रिय रूप से निर्णय ले रही हैं। बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर इस बदलाव में सबसे आगे हैं।


एक्स्ट्रा-मैरिटल संबंधों के कारण

2025 के IPSOS सर्वे के अनुसार, अफेयर्स का कारण हमेशा नकारात्मक नहीं होता। कई बार यह "समय की कमी" के कारण होता है। नौकरी की व्यस्तता और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच 33% लोग अपने लिए समय नहीं निकाल पाते। इसके अलावा, भावनात्मक जुड़ाव की कमी भी एक महत्वपूर्ण कारण है। कई लोग लंच ब्रेक या रात के समय ऐप का उपयोग करके थोड़ी राहत और रोमांच की तलाश करते हैं।


जेंडर स्टीरियोटाइप का टूटना

पहले यह माना जाता था कि केवल पुरुष ही बाहर संबंध बनाते हैं, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। सर्वे में 43% पुरुषों और 42% महिलाओं ने भावनात्मक या शारीरिक संबंधों की बात स्वीकार की है। यह दर्शाता है कि महिलाएं भी अब स्थिर विवाह से बाहर संतोष की तलाश कर रही हैं। लगभग आधे लोगों ने अपनी फैंटेसीज़ का भी जिक्र किया, जो पारंपरिक विवाह की अवधारणा पर सवाल उठाता है।


कहाँ और कब होती है सबसे ज्यादा गतिविधि?

बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में यह ट्रेंड सबसे अधिक देखा जा रहा है, लेकिन लखनऊ और सूरत जैसे टियर-2 शहर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। अधिकांश लोग दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक और रात 10 बजे से आधी रात तक ऐप का उपयोग करते हैं।


पुरुष आमतौर पर 25-30 साल की युवा महिलाओं को पसंद करते हैं, जबकि महिलाएं 30-40 साल के स्थापित पेशेवरों जैसे डॉक्टर या चार्टर्ड एकाउंटेंट की ओर आकर्षित होती हैं। यह दर्शाता है कि वित्तीय स्थिरता अभी भी महत्वपूर्ण है।


सोशल मीडिया और डिजिटल परिवर्तन

60% से अधिक लोग ऑनलाइन फ्लर्टिंग की सुविधा को बढ़ते अफेयर्स का कारण मानते हैं। ये ऐप्स उन लोगों को सुरक्षित और गुप्त स्थान प्रदान करते हैं जो भावनात्मक या शारीरिक रूप से असंतुष्ट महसूस करते हैं। जैसे-जैसे सामाजिक कलंक कम हो रहा है और यूजर बेस 40 लाख को पार कर रहा है, कई भारतीयों के लिए पारंपरिक वादे अब लचीले होते जा रहे हैं।