क्या लंबे समय तक बैठना बढ़ा सकता है कैंसर का खतरा? जानें विशेषज्ञों की राय
लंबे समय तक बैठने का स्वास्थ्य पर प्रभाव
नई दिल्ली: यदि आप सोचते हैं कि रोजाना जिम जाकर, योगाभ्यास करने या तेज़ चलने से आपकी सेहत का ध्यान रखा जा रहा है, तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है। आजकल की व्यस्त जीवनशैली में, लाखों लोग दिन का अधिकांश समय ऑफिस की कुर्सी या घर पर लैपटॉप के सामने बिताते हैं। हालिया शोध से पता चलता है कि लंबे समय तक बैठे रहने से, भले ही आप नियमित व्यायाम करते हों, गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बैठने की आदत शरीर पर ऐसे प्रभाव डाल सकती है, जो भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
शोध का निष्कर्ष
हाल ही में पीएलओएस मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में लंबे समय तक बैठे रहने और कैंसर के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध स्थापित किया गया है। यह अध्ययन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो डेस्क जॉब करते हैं या लंबे समय तक पढ़ाई करते हैं। शोधकर्ताओं ने 91,000 से अधिक वयस्कों पर 12 वर्षों तक अध्ययन किया और पाया कि जो लोग रोजाना 30 मिनट या उससे अधिक समय तक बिना उठे बैठे रहते हैं, उनमें कैंसर से संबंधित जटिलताओं और मृत्यु का जोखिम बढ़ता है।
हर अतिरिक्त घंटा बढ़ाता है खतरा
अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहने का हर अतिरिक्त घंटा कैंसर से मृत्यु के जोखिम को लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। हालांकि, यदि बैठने के समय को कम करके थोड़ी-थोड़ी शारीरिक गतिविधि की जाए, तो इस जोखिम को काफी हद तक घटाया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक घंटे की हल्की गतिविधि से खतरा लगभग 12 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
व्यायाम की आवश्यकता
डॉक्टरों का कहना है कि नियमित व्यायाम करना अत्यंत आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ वयस्कों को हर सप्ताह 150 से 300 मिनट तक मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देते हैं। इसके साथ-साथ पूरे दिन सक्रिय रहना भी महत्वपूर्ण है। एम्स, नई दिल्ली के डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत शरीर में कई बदलाव लाती है, जो कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
शरीर पर प्रभाव
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने से मांसपेशियां कम सक्रिय हो जाती हैं, जिससे शरीर में ग्लूकोज और फैट का संतुलन बिगड़ता है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना, हार्मोनल असंतुलन और सूजन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, रक्त संचार भी प्रभावित होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ सकती है।
कैसे बचें?
डॉ. अमित उपाध्याय का कहना है कि केवल बैठने का समय कम करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बीच-बीच में उठकर चलना भी आवश्यक है। हर 30 से 60 मिनट के बाद कुछ मिनट के लिए खड़े होकर चलना चाहिए। यदि संभव हो तो स्टैंडिंग डेस्क का उपयोग करें। फोन पर बात करते समय चलते रहें और कंप्यूटर पर किसी फाइल के खुलने का इंतजार करते समय भी बैठे रहने के बजाय थोड़ा चलें।