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क्या लो ब्लड प्रेशर अल्जाइमर के जोखिम को बढ़ाता है? नई रिसर्च में खुलासा

हाल ही में एक अध्ययन में यह पाया गया है कि निम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन) भी अल्जाइमर रोग से जुड़ा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने 8 लाख लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया और पाया कि निम्न रक्तचाप का संबंध अल्जाइमर से सबसे मजबूत था। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह संबंध कारण और परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जानें इस अध्ययन के निष्कर्ष और इसके महत्व के बारे में।
 

अल्जाइमर रोग और रक्तचाप का संबंध

नई दिल्ली: अल्जाइमर रोग को आमतौर पर एक मस्तिष्क संबंधी बीमारी माना जाता है, जो धीरे-धीरे व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और दैनिक कार्यों को करने की क्षमता को प्रभावित करती है। यह दुनिया भर में डिमेंशिया का प्रमुख कारण है और लाखों बुजुर्ग इससे ग्रसित हैं। हालांकि इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, वैज्ञानिक इसके कारणों और रोकथाम के उपायों पर लगातार शोध कर रहे हैं।


हाल ही में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह पाया गया है कि केवल उच्च रक्तचाप ही नहीं, बल्कि निम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन) भी अल्जाइमर रोग से संबंधित हो सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल दोनों स्थितियों के बीच संबंध को दर्शाता है, यह नहीं कि निम्न रक्तचाप सीधे अल्जाइमर का कारण बनता है।


इस अध्ययन में मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने लगभग 8 लाख लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया। इसके लिए ब्रिटेन के यूके बायोबैंक और अमेरिका के 'ऑल ऑफ अस रिसर्च प्रोग्राम' के आंकड़ों का उपयोग किया गया। दोनों डेटाबेस में शामिल लगभग 8 लाख प्रतिभागियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड के आधार पर, शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर और हृदय संबंधी 11 विभिन्न बीमारियों के बीच संबंधों की जांच की।


शोध में यह पाया गया कि अधिकांश हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का संबंध अल्जाइमर से था। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि निम्न रक्तचाप का संबंध सबसे मजबूत और लगातार दोनों समूहों में देखने को मिला। यह निष्कर्ष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक अल्जाइमर के संदर्भ में निम्न रक्तचाप पर अपेक्षाकृत कम शोध हुए हैं। आमतौर पर उच्च रक्तचाप को ही हृदय रोग और स्ट्रोक का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता रहा है।


अध्ययन में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और सेरेब्रल इन्फार्क्शन यानी स्ट्रोक के एक प्रकार का भी अल्जाइमर से मजबूत संबंध पाया गया। वहीं, शोधकर्ताओं को हार्ट अटैक (एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन) और अल्जाइमर के बीच कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला।


वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक स्तर पर भी विश्लेषण किया और पाया कि कुछ जीन, विशेष रूप से एपीओई और एमएपीटी, अल्जाइमर और हृदय संबंधी समस्याओं दोनों से जुड़े हो सकते हैं। ये जीन पहले से ही मस्तिष्क के कार्य और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबे समय तक रक्तचाप बहुत कम रहता है तो मस्तिष्क तक पर्याप्त मात्रा में रक्त, ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते। इससे समय के साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। एक अन्य संभावना यह भी है कि निम्न रक्तचाप और अल्जाइमर दोनों के पीछे कुछ समान जैविक प्रक्रियाएं काम कर रही हों, जिन्हें अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है। कुछ वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि निम्न रक्तचाप शुरुआती न्यूरोडीजेनेरेटिव बदलावों का संकेत हो सकता है।


शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उनके निष्कर्षों को कारण और परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अभी यह साबित नहीं हुआ है कि निम्न रक्तचाप अल्जाइमर का कारण बनता है। इस संबंध को बेहतर तरीके से समझने के लिए आगे और क्लीनिकल तथा जैविक अध्ययन आवश्यक हैं।