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गर्मी में हीट स्ट्रोक से बचने के उपाय: जानें विशेषज्ञों की सलाह

दिल्ली और अन्य राज्यों में गर्मी की तीव्रता बढ़ने से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। जानें विशेषज्ञों से, कैसे इस स्थिति से बचा जा सकता है। हल्के कपड़े पहनने, नियमित पानी पीने और खान-पान में सावधानी बरतने के उपायों के साथ-साथ बच्चों की देखभाल के लिए भी उपयोगी सुझाव दिए गए हैं।
 

गर्मी की तीव्रता और स्वास्थ्य पर प्रभाव

दिल्ली और अन्य राज्यों में इस समय अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। इस गर्मी के कारण लोगों की स्थिति काफी खराब हो गई है। इससे बचने के लिए लोग विभिन्न उपाय कर रहे हैं। गर्म हवाओं, उमस, तेज धूप और उच्च तापमान के कारण हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो बाहर काम करते हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गर्मी से बचने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करें?

दिल्ली के एम्स अस्पताल के चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. नवल विक्रम के अनुसार, ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिनका तापमान 106 से 107 डिग्री तक पहुंच जाता है, जिसे हाइपरपायरेक्सिया कहा जाता है।



  • यदि आप बाहर काम कर रहे हैं, तो हल्के कपड़े पहनें और अपने सिर को ढककर रखें।

  • अगर आपने कुछ समय धूप में बिताया है, तो थोड़ी देर छांव में आराम करें। इससे शरीर का तापमान सामान्य हो जाएगा।

  • नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। पानी पीने से पसीना आएगा, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहेगा। यदि आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं, तो पसीना कम आएगा, जिससे त्वचा सूखी हो जाएगी और तापमान बढ़ सकता है। हर घंटे पानी पीने की आदत डालें।

  • हीट स्ट्रोक के मरीजों को आईवी फ्लूड दिया जाता है ताकि उनका तापमान कम किया जा सके। इसके अलावा, नाक से पेट में नली डालकर भी पानी दिया जाता है।


खान-पान में क्या ध्यान रखें?

एम्स की प्रमुख डाइटिशियन डॉ. परमीत कौर के अनुसार, इस मौसम में हल्का भोजन करना चाहिए। मसालेदार चीजों से बचें और दही, छाछ, पुदीना की चटनी और बेल का शरबत अपने आहार में शामिल करें।


अत्यधिक मीठा, नमकीन और तला हुआ भोजन खाने से बचें। शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए घर पर ओआरएस तैयार करें।


बच्चों की देखभाल कैसे करें?

बच्चों को नियमित रूप से पानी पिलाते रहें और उन्हें कम चीनी वाली चीजें दें। उन्हें हवादार कमरे में रखें और बाहर खेलने से मना करें। हल्के कपड़े पहनाने का ध्यान रखें। यदि किसी बच्चे को पहले से कोई बीमारी है, तो उनका विशेष ध्यान रखें।