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गुजराती खाटो लोट: बारिश में परोसने के लिए एक परंपरागत और सेहतमंद नाश्ता

गुजरात के पारंपरिक व्यंजनों में खाटो लोट एक अनोखा और सेहतमंद नाश्ता है। बारिश के मौसम में दही और दाल-चावल के मेल से बना यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि पौष्टिक भी है। जानें इसे बनाने की विधि और इसके स्वास्थ्य लाभ।
 

गुजरात के स्वादिष्ट व्यंजनों की अनकही कहानी


नई दिल्ली: जब भी गुजरात के खाने की बात होती है, तो ढोकला, खांडवी और उंधियू का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते कि गुजराती व्यंजनों की विविधता इससे कहीं अधिक है। यहां की रसोई में कई पारंपरिक स्वाद छिपे हुए हैं, जो न केवल स्वादिष्ट हैं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं। इनमें से एक खास व्यंजन है खाटो लोट। बारिश के मौसम में जब हल्के और चटपटे नाश्ते की तलाश होती है, तब दही और दाल-चावल का यह मेल एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आता है।


स्वाद और सेहत का अद्भुत संगम

खाटो लोट की खासियत यह है कि इसमें उपयोग किए जाने वाले अनाज इसे और भी पौष्टिक बनाते हैं। इसे बनाने के लिए साबुत हरी मूंग दाल, पीली मूंग दाल और चावल की बराबर मात्रा (लगभग एक-चौथाई कप) को अच्छे से धोकर तैयार किया जाता है।


इसके बाद, बिना तेल के पैन में इन्हें तब तक भुना जाता है जब तक इनकी नमी पूरी तरह से खत्म न हो जाए। जब मिश्रण ठंडा हो जाए, तो इसे मिक्सी में डालकर हल्का दरदरा पीस लिया जाता है, जिससे डिश में एक बेहतरीन टेक्सचर आता है।


तड़का और छाछ का मिश्रण कैसे बनाएं

तड़का और छाछ का मिश्रण


यह रेसिपी दिखने में 'खीचू' से मिलती-जुलती है और खट्टे-मीठे तथा तीखे स्वाद का एक नया अनुभव देती है। अगली प्रक्रिया में आधा कप दही में दो गिलास पानी मिलाकर पतली छाछ तैयार की जाती है। दूसरी ओर, कड़ाही में मूंगफली का तेल गरम करके उसमें राई, जीरा, मेथी दाना, सूखी लाल मिर्च और कढ़ी पत्ते का तड़का लगाया जाता है। स्वाद को और बढ़ाने के लिए इसमें हरी मिर्च और अदरक का पेस्ट मिलाया जाता है। तड़के की खुशबू आने पर इसमें हल्दी और सफेद तिल डालकर इसे और भी स्वादिष्ट बनाया जाता है।


असली जायका धीमी आंच पर पककर आता है

धीमी आंच पर पककर तैयार होता है असली जायका


तड़का तैयार होने के बाद इसमें भुने हुए दाल-चावल का दरदरा पाउडर डालकर दो मिनट तक भुना जाता है। फिर धीरे-धीरे छाछ डाली जाती है और कड़छी को लगातार चलाया जाता है ताकि घोल में गुठलियां न पड़ें। जब यह मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तब इसमें स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। पकने के बाद इसे प्लेट में निकालकर ऊपर से अचार का मसाला, मूंगफली का तेल और बारीक कटा हरा धनिया डालकर गरमा-गरम परोसा जाता है। बारिश के मौसम में दही और दाल-चावल का यह मेल एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरता है।