☰
×

डायबिटीज के प्रभाव: शरीर के अंगों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव

डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जो न केवल शुगर लेवल को प्रभावित करती है, बल्कि शरीर के विभिन्न अंगों पर भी दुष्प्रभाव डालती है। भारत में बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि डायबिटीज के कारण कौन-कौन से अंग प्रभावित होते हैं, जैसे कि पैर, आंखें, किडनी, और हृदय। इसके अलावा, हम यह भी देखेंगे कि कैसे ये समस्याएं धीरे-धीरे विकसित होती हैं और मरीजों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
 

डायबिटीज: एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या

डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है। 2023 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 101 मिलियन लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, जबकि 136 मिलियन लोग प्रीडायबिटीज के शिकार हैं। यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि बड़ी संख्या में लोगों को इस बीमारी से संबंधित समस्याओं को समझने की आवश्यकता है।


डायबिटीज के दुष्प्रभाव

अधिकतर डायबिटीज के मरीज इंसुलिन, शुगर लेवल और आहार पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि वे समझें कि यह बीमारी उनके अंगों पर भी प्रभाव डालती है। यह आंखों, लिवर, दिल और किडनी को प्रभावित कर सकती है। कुछ मरीजों को पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं, क्योंकि उनके पेट को नियंत्रित करने वाली नसें ठीक से कार्य नहीं करतीं। यह नुकसान धीरे-धीरे होता है।


शरीर के अंगों पर पड़ने वाला असर

पैरों में संवेदनहीनता


पेरिफेरल न्यूरोपैथी तब होती है जब लंबे समय तक उच्च रक्त शर्करा नसों को नुकसान पहुंचाती है। शुरुआत में मरीज जलन, झुनझुनी और सुई चुभने का अनुभव कर सकते हैं। कुछ लोगों को पैर की उंगलियों और पैरों में संवेदनशीलता खत्म हो जाती है, जिससे उन्हें चोट का पता नहीं चलता।


आंखों की रोशनी पर प्रभाव


डायबिटीज के मरीजों को रेटिनोपैथी की समस्या हो सकती है, जो आंख के पीछे के लाइट-सेंसिटिव टिशू पर असर डालती है। इसकी छोटी रक्त वाहिकाएं उच्च रक्त शर्करा के कारण कमजोर हो सकती हैं। 2021 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, डायबिटीज वाले 22.27% लोगों में कुछ हद तक रेटिनोपैथी थी।


किडनी पर प्रभाव


डायबिटीज से किडनी की कार्यक्षमता कम हो सकती है। डायबिटिक मरीजों में क्रोनिक किडनी डिजीज और गंभीर मामलों में किडनी फेलियर का खतरा होता है। CDC के अनुसार, डायबिटीज वाले 3 में से 1 व्यक्ति को क्रोनिक किडनी डिजीज है।


हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा


उच्च रक्त शर्करा के कारण उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की समस्या हो सकती है, जिससे हृदय की धमनियां संकुचित हो जाती हैं। CDC के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में हृदय रोग का खतरा दोगुना बढ़ जाता है।


मस्तिष्क पर प्रभाव


डायबिटीज के कारण डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है। अध्ययन के अनुसार, इसमें मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली नसों को नुकसान, सूजन और इंसुलिन प्रतिरोध से जुड़े मेटाबोलिक परिवर्तन शामिल हो सकते हैं।