डायबिटीज के मरीजों के लिए घी: लाभ और सावधानियां
डायबिटीज और डाइट मैनेजमेंट
फरीदाबाद, 05 मई। मधुमेह से ग्रसित लोगों के लिए सही आहार प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है। फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों का एक सामान्य प्रश्न घी के सेवन के बारे में होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि घी को पूरी तरह से डाइट से हटाना उचित नहीं है, बल्कि इसे संतुलित मात्रा में शामिल करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
घी का शुगर लेवल पर प्रभाव
अमृता हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मोहित शर्मा के अनुसार, घी में स्वस्थ वसा होती है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। चूंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट नहीं होते, यह रक्त शर्करा में अचानक वृद्धि नहीं करता। सीमित मात्रा में घी का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और मेटाबॉलिज्म को सुधारता है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स में कमी
क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट चारू दुआ बताती हैं कि घी भोजन के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम करने में मदद करता है। जब दाल, चावल या रोटी के साथ थोड़ा घी लिया जाता है, तो कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण की गति धीमी हो जाती है। इससे भोजन के बाद शुगर लेवल धीरे-धीरे बढ़ता है, जो कि मरीजों के लिए फायदेमंद है।
घर का बना घी: पोषण का स्रोत
डाइट विशेषज्ञों का मानना है कि घर का बना घी विटामिन A, D, E और K जैसे आवश्यक फैट-सॉल्यूबल विटामिन्स से भरपूर होता है। ये पोषक तत्व हड्डियों की मजबूती और आंतों की सेहत के लिए आवश्यक हैं। चारू दुआ सलाह देती हैं कि बाजार के मिलावटी घी के बजाय घर पर बना शुद्ध घी ही उपयोग करना चाहिए।
सुरक्षित मात्रा का सेवन
डॉ. मोहित शर्मा के अनुसार, एक सामान्य डायबिटीज मरीज को रोजाना 1 से 2 चम्मच घी का सेवन करना सुरक्षित है। हालांकि, जिन मरीजों का वजन अधिक है या कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ा हुआ है, उन्हें इसकी मात्रा के बारे में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। घी का अधिक सेवन वजन बढ़ा सकता है, जिससे मधुमेह को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।
घी का सही उपयोग
विशेषज्ञों के अनुसार, घी को कभी भी तले हुए खाद्य पदार्थों या जंक फूड के साथ नहीं लेना चाहिए। इसे दाल, सब्जी या चपाती पर डालकर खाना सबसे अच्छा तरीका है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ घी का सही संतुलन मधुमेह के मरीजों को स्वस्थ जीवन जीने में मदद करता है।