दिल की सेहत: HDL, LDL और ट्राइग्लिसराइड्स का महत्व
दिल की बीमारियों से जुड़े कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स
ट्राईग्लिसराइड्स, LDL और HDL ये तीनों तत्व दिल की स्वास्थ्य से संबंधित हैं। आमतौर पर, LDL को खराब कोलेस्ट्रॉल, HDL को अच्छा कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को रक्त में जमा होने वाला फैट माना जाता है। इन तीनों के स्तर में बदलाव दिल की सेहत पर प्रभाव डाल सकता है। इस लेख में, हम इन तीनों के बीच के संबंध और दिल की बीमारियों से इनके संबंध पर चर्चा करेंगे।
HDL क्या है?
HDL का पूरा नाम हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन है, जो लिपिड्स से बना होता है। इसे अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है क्योंकि यह रक्त प्रवाह से कोलेस्ट्रॉल और अन्य हानिकारक पदार्थों को लिवर तक पहुंचाता है। लिवर इन पदार्थों को तोड़कर शरीर से बाहर निकालता है। कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा पदार्थ है, जो शरीर के सभी ऊतकों में पाया जाता है। यह सेहतमंद कोलेस्ट्रॉल शरीर के सेल्स के सही कार्य में मदद करता है और विटामिन डी तथा हार्मोन के निर्माण में भी सहायक होता है। HDL दिल की बीमारियों और स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है।
LDL क्या है?
LDL का मतलब लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन है, जिसे खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। इसके कणों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक और प्रोटीन की मात्रा कम होती है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कोशिकाओं तक पहुंचाता है। जब LDL का स्तर बढ़ता है, तो यह आर्टरी में चिपकने लगता है, जिससे प्लाक बनता है। यह प्लाक आर्टरी को सख्त और संकीर्ण कर देता है, जिससे रक्त प्रवाह में रुकावट आती है। यदि यह प्लाक फट जाता है, तो स्ट्रोक या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
ट्राइग्लिसराइड्स क्या हैं?
ट्राइग्लिसराइड्स शरीर में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट है, जो स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता है। यह रक्त में एक लिपिड के रूप में मौजूद रहता है। जब लोग अधिक कैलोरी लेते हैं, तो शरीर इसे ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है। जब शरीर को कैलोरी की आवश्यकता होती है, तो ये रक्त में रिलीज होते हैं। यदि ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ता है, तो यह लिपिड डिसऑर्डर का कारण बन सकता है। HDL का स्तर कम और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर अधिक होने पर यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के माध्यम से शरीर में कोलेस्ट्रॉल और फैट की जांच की जा सकती है। इस टेस्ट में कुल कोलेस्ट्रॉल, HDL, LDL और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच की जाती है। दिल की बीमारियों या स्ट्रोक के जोखिम का आकलन करने के लिए यह टेस्ट आवश्यक है। टेस्ट से पहले 9 से 12 घंटे की उपवास की आवश्यकता होती है, लेकिन इस दौरान पानी पीना संभव है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट से 24 घंटे पहले शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
डॉक्टर से कब मिलें?
यदि आपको लगातार उच्च रक्तचाप, अनियंत्रित ब्लड शुगर, अत्यधिक पसीना, सीने में दर्द, आराम की स्थिति में सांस फूलना, या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।