नकली दवाओं से बचने के लिए क्यूआर कोड वेरिफिकेशन का उपयोग कैसे करें
भारतीय बाजार में नकली दवाओं की समस्या
भारतीय बाजार में मिलावटी दवाओं के मामले अक्सर सामने आते हैं। लोगों के मन में यह चिंता रहती है कि वे जो दवा ले रहे हैं, वह असली है या नहीं। असली और नकली दवाओं के बीच का अंतर समझना कठिन होता है, लेकिन इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। नकली दवाएं न केवल बीमारी का इलाज नहीं करतीं, बल्कि मरीज की स्थिति को और भी बिगाड़ सकती हैं। इसके साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं और दवा कंपनियों पर लोगों का विश्वास भी घटता जा रहा है। इस समस्या का समाधान करने के लिए सरकार और दवा नियामक संस्थाओं ने क्यूआर कोड वेरिफिकेशन सिस्टम की शुरुआत की है, जिससे लोग अपने स्मार्टफोन से दवा की असलियत की जांच कर सकते हैं।
क्यूआर कोड वेरिफिकेशन सिस्टम की जानकारी
क्यूआर कोड वेरिफिकेशन एक डिजिटल सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें दवा की पैकेजिंग पर एक विशेष क्यूआर कोड होता है। इस कोड में दवा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी जैसे बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और निर्माता का लाइसेंस नंबर संग्रहित होता है। जब कोई व्यक्ति इस कोड को स्कैन करता है, तो उसे दवा की पूरी जानकारी तुरंत अपने फोन पर दिखाई देती है, जिससे यह पता लगाना आसान हो जाता है कि दवा असली है या नकली।
स्मार्टफोन से दवा की जांच कैसे करें
आजकल लगभग सभी स्मार्टफोनों में क्यूआर कोड स्कैन करने की सुविधा होती है। यदि आपके फोन में यह फीचर नहीं है, तो आप प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से कोई क्यूआर स्कैनर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।
दवा की पैकिंग पर मौजूद क्यूआर कोड को अपने फोन के कैमरे से स्कैन करें। जैसे ही स्कैनिंग पूरी होगी, दवा से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी आपके मोबाइल स्क्रीन पर प्रदर्शित होने लगेगी। इसमें बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और कंपनी का लाइसेंस नंबर शामिल होता है। यह प्रक्रिया कुछ सेकंड में पूरी हो जाती है और आपको दवा की सच्चाई का पता चल जाता है।
कैसे पहचानें दवा असली है या नकली
स्कैनिंग के बाद जो जानकारी आपके फोन पर दिखाई देती है, उसे दवा की पैकिंग पर छपी जानकारी से मिलाना आवश्यक है। यदि दोनों जानकारियां समान हैं, तो दवा असली है और इसका उपयोग सुरक्षित है।
हालांकि, यदि स्क्रीन पर "No Record Found" दिखाई दे या जानकारी मेल न खाती हो, तो सावधान हो जाएं। ऐसी स्थिति में उस दवा का उपयोग तुरंत बंद कर दें और इसकी जानकारी सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) को दें। यह कदम आपके और दूसरों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्यूआर कोड से दवा जांचने के सरल कदम
1. सबसे पहले दवा की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड खोजें।
2. ध्यान रखें कि यह नियम भारत की शीर्ष 300 दवा ब्रांडों पर लागू है।
3. अब अपने स्मार्टफोन के कैमरे या क्यूआर स्कैनर ऐप से कोड स्कैन करें।
4. स्क्रीन पर दिख रही जानकारी को पैकेट पर छपी जानकारी से मिलाएं।
5. यदि जानकारी मेल नहीं खाती या कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो तुरंत CDSCO को शिकायत दर्ज करें।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी सभी दवाओं पर क्यूआर कोड उपलब्ध नहीं है, लेकिन भविष्य में इसे सभी दवाओं के लिए अनिवार्य किया जा सकता है। इससे नकली दवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने में मदद मिलेगी।
जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
नकली दवाओं से बचने के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि जागरूकता भी आवश्यक है। हमेशा विश्वसनीय मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदें और बिल अवश्य लें। यदि किसी दवा पर संदेह हो, तो तुरंत जांच करें और संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। आपके द्वारा उठाया गया छोटा सा कदम न केवल आपकी बल्कि कई अन्य लोगों की जिंदगी बचा सकता है।