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नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित मंदिरों की यात्रा

नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' की चर्चा के बीच, उनके जीवन से जुड़े प्रमुख मंदिरों की यात्रा की जानकारी प्राप्त करें। कैंची धाम के अलावा, नैनीताल, अल्मोड़ा, दिल्ली और वृंदावन में स्थित मंदिरों का दौरा करें। जानें कि कैसे पहुंचें और इन स्थानों का महत्व क्या है।
 

नीम करौली बाबा की फिल्म और कैंची धाम

हाल ही में नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' चर्चा का विषय बनी हुई है। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की है। जब भी नीम करौली बाबा का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले कैंची धाम का ख्याल आता है, जो नैनीताल के निकट स्थित है और यह मंदिर न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्ध है। 


नीम करौली बाबा का प्रभाव

यहां लोग मानसिक शांति के लिए आते हैं। आपने शायद सुना होगा कि मार्क जुकरबर्ग, स्टीव जॉब्स, विराट कोहली, अनुष्का शर्मा, जूलिया रॉबर्ट्स और रश्मि देसाई जैसे कई प्रसिद्ध लोग यहां आ चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाबा का संबंध केवल कैंची धाम तक सीमित नहीं था?
भारत के विभिन्न स्थानों पर उनकी भक्ति और जीवन से जुड़ी कई जगहें आज भी मौजूद हैं। इनमें से कुछ मंदिर उनकी प्रेरणा से बने हैं, जबकि अन्य स्थानों पर उन्होंने हनुमान मंदिर और आश्रम की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 


नीम करौली बाबा के जीवन से जुड़ी जगहें

यदि आप नीम करौली बाबा के अनुयायी हैं या उनके जीवन से संबंधित स्थलों का दौरा करना चाहती हैं, तो कैंची धाम के अलावा इन चार स्थानों को अवश्य देखें।


नीम करौली बाबा कौन थे?

नीम करौली बाबा 20वीं सदी के एक महान संत थे, जिन्हें भक्त हनुमान जी का अवतार माना जाता है। उनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था। भक्ति के प्रति उनकी गहरी रुचि के कारण उन्होंने गृहस्थ जीवन छोड़कर तपस्या की। उनका 'ट्रेन वाला किस्सा' बहुत प्रसिद्ध है। एक बार जब अंग्रेज टीटीई ने उन्हें नीम करोली स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया, तो गाड़ी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी। जब बाबा वापस चढ़े, तभी ट्रेन चल पड़ी। इसी घटना के कारण उनका नाम 'नीम करोली बाबा' पड़ा। उत्तराखंड का कैंची धाम उनका मुख्य आश्रम है।


नीम करौली बाबा द्वारा स्थापित मंदिर

नैनीताल का हनुमान गढ़ी मंदिर
नैनीताल जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए हनुमान गढ़ी एक अद्भुत स्थान है। यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है और यहां भगवान राम और शिव के मंदिर भी हैं। यह मंदिर 1950 के आसपास नीम करौली बाबा द्वारा बनवाया गया था। यहां लोग सूर्यास्त का आनंद लेने के लिए आते हैं। यदि आप नैनीताल जा रहे हैं, तो हनुमान गढ़ी को अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें।
कैसे पहुंचें नैनीताल के हनुमान गढ़ी?
 - हनुमान गढ़ी नैनीताल में स्थित है।
 - नैनीताल से आप बस, कैब या शेयरिंग टैक्सी से पहुंच सकते हैं।
 - निकटतम बड़ा रेलवे स्टेशन काठगोदाम है।
 - काठगोदाम से मंदिर की दूरी 32 किलोमीटर है।


काकड़ीघाट आश्रम

अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित काकड़ीघाट आश्रम
उत्तराखंड में काकड़ीघाट आश्रम भी एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह भवाली से अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित है। यहां नीम करौली बाबा ने हनुमान मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में सिद्धि मां ने मंदिर का कार्य पूरा किया और पुराने शिव मंदिर की मरम्मत करवाई।
कैसे पहुंचें?
काठगोदाम से काकड़ीघाट आश्रम की दूरी लगभग 65 किलोमीटर है। आप काठगोदाम रेलवे स्टेशन के बाहर से अल्मोड़ा या रानीखेत जाने वाली टैक्सी या बसें ले सकती हैं।


दिल्ली का बिरला हनुमान मंदिर

दिल्ली का बिरला हनुमान मंदिर
दिल्ली में नीम करौली बाबा का एक मंदिर बेला रोड पर स्थित है। यहां बाबा के भक्तों को बताया गया था कि यमुना किनारे जमीन के नीचे हनुमान जी की एक मूर्ति है। इस स्थान से उनका संबंध गहरा होता गया और उन्होंने यहां हनुमान मंदिर की स्थापना की। यहां के दर्शन अवश्य करें।
बिरला हनुमान मंदिर कैसे पहुंचें?
 - मेट्रो से- लाल किला या चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन से लगभग 1.5 से 2 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां से आप ई-रिक्शा या ऑटो ले सकती हैं।
 - बस से- कश्मीरी गेट आईएसबीटी या रिंग रोड की तरफ आने वाली बस में बैठें। यह मंदिर राजघाट के पास स्थित है।
 - कैब से- यदि आप बस, ऑटो या मेट्रो से नहीं जाना चाहती हैं, तो कैब भी ले सकती हैं।


वृंदावन आश्रम

वृंदावन आश्रम
दिल्ली-एनसीआर के लोग अक्सर मथुरा-वृंदावन की यात्रा करते हैं। यदि आपका वृंदावन जाने का कार्यक्रम है, तो यहां भी नीम करौली बाबा से संबंधित एक महत्वपूर्ण स्थान है। वृंदावन में बाबा का आश्रम और हनुमान मंदिर है। यहां पहला मंदिर 1967 में स्थापित किया गया था। परिसर में बाबा का समाधि मंदिर भी है।
कैसे पहुंचें
वृंदावन में बाबा का यह आश्रम मथुरा रोड से कुछ ही दूरी पर परिक्रमा मार्ग पर स्थित है। आप टैक्सी, रिक्शा या ई-रिक्शा से यहां पहुंच सकती हैं।