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पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मामले: जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो नए मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। जानें इस वायरस के लक्षण, इसके फैलने का तरीका और इससे बचने के उपाय। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, संक्रमित जानवरों से दूर रहना और PPE का उपयोग करना आवश्यक है। इस लेख में निपाह वायरस की गंभीरता और इसके प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।
 

निपाह वायरस का खतरा फिर से बढ़ा

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस ने एक बार फिर से लोगों के बीच चिंता का माहौल बना दिया है। राज्य में दो नए मामलों के सामने आने के बाद, विशेषज्ञों की एक राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम को तैनात किया गया है। ये मामले 11 जनवरी 2026 को AIIMS कल्याणी में ICMR की वायरस रिसर्च और डायग्नोस्टिक लैब में दर्ज किए गए। दोनों मरीजों की स्थिति गंभीर है और वे वेंटिलेटर पर हैं। इस खतरनाक वायरस से निपटने के लिए हमें इसके बारे में गहराई से समझना आवश्यक है।


निपाह वायरस की उत्पत्ति और फैलने का तरीका

निपाह वायरस की पहचान सबसे पहले 1998-99 में मलेशिया में हुई थी, जहां यह सुअर पालकों के बीच फैला और 100 से अधिक लोगों की जान ले ली। भारत में, इसका पहला मामला 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सामने आया, और इसके बाद 2007 में नदिया जिले में भी इसके मरीज पाए गए।

निपाह वायरस क्या है?

यह एक ज़ूनोटिक वायरस है, जो मुख्य रूप से चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है। चमगादड़ खुद बीमार नहीं होते, लेकिन वे दूषित फलों या डेट पाम सैप के माध्यम से वायरस को फैला सकते हैं। यह संक्रमित व्यक्ति से निकट संपर्क, शारीरिक तरल पदार्थों या सांस की बूंदों के जरिए भी फैल सकता है। चूंकि कोई विशेष एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए उपचार सहायक होता है, जिसमें लक्षणों का प्रबंधन और गहन देखभाल शामिल है।


निपाह वायरस के लक्षण और जोखिम

इस वायरस के प्रारंभिक लक्षण सामान्य इन्फ्लूएंजा जैसे होते हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान। इसके बाद स्थिति गंभीर हो सकती है, जिसमें चक्कर आना, भ्रम, सांस लेने में कठिनाई और मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) जैसी समस्याएं शामिल हैं। गंभीर मामलों में मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मृत्यु दर 40-75% तक हो सकती है, जो प्रकोप की गंभीरता और चिकित्सा सुविधाओं पर निर्भर करती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निपाह वायरस दुर्लभ है, लेकिन जब यह फैलता है, तो यह गंभीर होता है। बचाव के लिए चमगादड़ों या संक्रमित जानवरों से दूर रहने और गिरे हुए फलों को न खाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, स्वास्थ्यकर्मियों को पीड़ित मरीजों से मिलने के लिए PPE का उपयोग करना अनिवार्य है।