पूर्ण भुजंगासन: योग से स्वास्थ्य में सुधार का एक प्रभावी तरीका
योग और स्वास्थ्य
योग का अभ्यास शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक होता है। आज के व्यस्त जीवन में, योगासन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। योग विशेषज्ञ पूर्ण भुजंगासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं।
पूर्ण भुजंगासन का महत्व
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, पूर्ण भुजंगासन एक प्रभावी आसन है। यह भुजंगासन का उन्नत रूप है, जो रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, पीठ और शरीर को मजबूत करता है, और छाती को खोलकर श्वसन क्षमता को बढ़ाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अभ्यास से यह आसन कंधों, गर्दन और कमर की जकड़न को भी दूर करता है।
पूर्ण भुजंगासन करने की विधि
पूर्ण भुजंगासन का अभ्यास सावधानी से करना चाहिए। सबसे पहले, पेट के बल लेटें और हथेलियों को कंधों के पास रखें। सांस लेते हुए, छाती, गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं, कोहनियों को थोड़ा मोड़ें और कंधों को पीछे की ओर खींचें।
इसके बाद, घुटनों को मोड़कर पैरों के पंजे ऊपर उठाएं। सिर और गर्दन को पीछे की ओर तानें और पैरों से सिर छूने का प्रयास करें। इस मुद्रा में आराम से रुकें और फिर धीरे-धीरे शवासन की स्थिति में लौटें। गहरी सांस लें और हृदय गति को सामान्य होने दें।
पूर्ण भुजंगासन के लाभ
इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी लचीली होती है, पाचन तंत्र मजबूत होता है, थायरॉइड ग्रंथि सक्रिय होती है, और तनाव में कमी आती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या पीठ दर्द से परेशान हैं। हालांकि, गर्भवती महिलाओं, गंभीर पीठ की समस्याओं, उच्च रक्तचाप, हर्निया या हाल ही में सर्जरी कराने वालों को इस आसन से बचना चाहिए।
अभ्यास के लिए सुझाव
शुरुआत में इस आसन को धीरे-धीरे सीखना चाहिए और किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना बेहतर होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग आसनों का अभ्यास धैर्य और नियमितता के साथ करना चाहिए। पूर्ण भुजंगासन जैसे उन्नत आसन शरीर की क्षमता को बढ़ाते हैं, लेकिन गलत तरीके से करने पर चोट लगने का खतरा होता है।