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प्रतीक यादव की मृत्यु: पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म के खतरों पर एक नज़र

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का निधन 38 वर्ष की आयु में हुआ। उनकी मृत्यु का कारण पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म बताया गया है, जो खून के थक्कों के जमने से संबंधित एक गंभीर स्थिति है। इस लेख में हम इस बीमारी के कारण, लक्षण और इससे बचने के उपायों पर चर्चा करेंगे। जानें कि कैसे जागरूकता और सावधानी से इस जानलेवा स्थिति से बचा जा सकता है।
 

प्रतीक यादव का निधन

13 मई को समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का निधन हो गया। उनकी उम्र केवल 38 वर्ष थी। हाल के दिनों में उन्हें सांस लेने में कठिनाई और पैरों की नसों में खून जमने की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मृत्यु का कारण पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म बताया गया है। इस स्थिति में खून के थक्के जमने से दिल और फेफड़ों का कार्य प्रभावित होता है, जिससे व्यक्ति की अचानक मृत्यु हो सकती है।


पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म क्या है?

प्रतीक की मृत्यु के बाद खून में थक्के बनने की बीमारी डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) फिर से चर्चा में आ गई है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि शरीर में ब्लड क्लॉट कब बनता है। जब शरीर में चोट लगती है, तो खून के बहाव को रोकने के लिए क्लॉट बनता है। कभी-कभी बिना चोट के भी नसों में खून जमने लगता है। यदि ब्लड क्लॉट बड़ा हो जाए, तो यह टूटकर शरीर के अन्य हिस्सों में चला जाता है, जिसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस कहा जाता है। जब ये थक्के फेफड़ों की नसों में पहुंचते हैं, तो इसे पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म (PTE) कहा जाता है, जो जानलेवा हो सकता है।


इस बीमारी के कारण

  • लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहना
  • सर्जरी या चोट लगना
  • खून में थक्के बनने का डिसऑर्डर
  • कैंसर और अन्य बीमारियां


Cleveland Clinic के अनुसार, पल्मोनरी थ्रॉम्बो के लक्षणों में पैरों में दर्द, सूजन, गर्मी, सीने में तेज दर्द, खांसी, त्वचा का रंग पीला पड़ना, चक्कर आना और बेहोशी शामिल हैं।


बचाव के उपाय

इस बीमारी से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए: एक ही जगह पर लंबे समय तक न बैठें, काम के दौरान बीच-बीच में टहलें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, नियमित रूप से व्यायाम करें, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें, और शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें। जागरूकता से इस बीमारी से बचा जा सकता है। सांस फूलने की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।