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प्रधानमंत्री मोदी का बंधेज साफा: भारतीय संस्कृति का प्रतीक और हस्तशिल्प का सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले में बंधेज साफा पहनकर भारतीय संस्कृति और हस्तशिल्प को सम्मानित किया। इस विशेष पगड़ी का गहरा लाल रंग और सफेद बिंदुओं का प्रिंट, ऊर्जा और शुभता का प्रतीक है। पीएम मोदी ने अपने इस परिधान के माध्यम से 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को मजबूत किया और भारतीय हस्तकला को वैश्विक पहचान दिलाने का संदेश दिया। जानें इस बंधेज कला के पीछे की कहानी और इसके महत्व के बारे में।
 

80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का विशेष परिधान


नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले में आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पारंपरिक परिधान सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा था। 2014 से स्वतंत्रता दिवस पर बहुरंगी साफा पहनने की अपनी परंपरा को बनाए रखते हुए, इस बार उन्होंने गहरे लाल रंग की आकर्षक राजस्थानी 'बंधेज' पगड़ी धारण की। लगातार 13वीं बार तिरंगे को फहराते हुए, पीएम मोदी ने इस पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से भारतीय हस्तकला को वैश्विक पहचान दिलाने और 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को मजबूत करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। बंधेज को पश्चिमी भारत में शुभता, उत्सव और सम्मान का प्रतीक माना जाता है, और यह भारतीय परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।


बंधेज कला: भारतीय संस्कृति का गौरव

प्रधानमंत्री द्वारा पहनी गई बंधेज की यह विशेष पगड़ी केवल एक परिधान नहीं है, बल्कि यह भारतीय हस्तशिल्प और कारीगरों की मेहनत को सम्मानित करने का एक सशक्त माध्यम है।


बंधेज कला, जो मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात में प्रचलित 'टाई एंड डाई' हस्तकला का एक अद्भुत उदाहरण है, कपड़ों को धागों से बांधकर और रंगकर खूबसूरत आकृतियां उभारी जाती हैं।


साफे का रंग और उसका महत्व

इस बार प्रधानमंत्री की पगड़ी का आधार गहरा लाल रंग था, जिस पर सफेद रंग के छोटे-छोटे बिंदुओं का खूबसूरत प्रिंट था। बंधेज कला में लाल रंग को ऊर्जा, शक्ति, उत्साह और शुभता का प्रतीक माना जाता है। पीएम मोदी ने इस विशेष साफे को सादे सफेद कुर्ता-पायजामा और जैकेट के साथ पहना, जिसने उनके लुक को संतुलित और प्रभावशाली बनाया। इस पहनावे के माध्यम से देश के बुनकरों, स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प उद्योग को नया प्रोत्साहन मिला है। हर साल, पीएम मोदी अपने साफे के जरिए देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि की झलक पेश करते हैं। इस बार भी उनका यह बंधेज साफा भारतीय धरोहर के प्रति सम्मान और देशज कलाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।