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प्रेग्नेंसी में यूटीआई: कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें यूटीआई एक प्रमुख समस्या है। इस लेख में, हम प्रेग्नेंसी में यूटीआई के विभिन्न प्रकार, इसके कारण, लक्षण और उपचार के तरीकों पर चर्चा करेंगे। जानें कि कैसे सही समय पर पहचान और उपचार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही, हम यूटीआई से बचाव के उपाय भी साझा करेंगे, ताकि गर्भवती महिलाएं स्वस्थ रह सकें।
 

प्रेग्नेंसी में यूटीआई के बारे में जानकारी

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई परिवर्तन होते हैं। हार्मोनल बदलाव और पेशाब के प्रवाह में कमी के कारण, गर्भवती महिलाओं में कभी-कभी बैक्टीरिया विकसित हो सकते हैं, जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) हो सकता है। यह लेख प्रेग्नेंसी में UTI के कारण, लक्षण, बच्चे पर प्रभाव और उपचार के बारे में जानकारी प्रदान करेगा।


प्रेग्नेंसी में UTI के प्रकार

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था में UTI के चार प्रमुख प्रकार होते हैं, जिनकी पहचान करना आवश्यक है।


असिम्प्टोमैटिक बैक्टीरियुरिया

इस स्थिति में महिलाओं को UTI के कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन यूरिन कल्चर में बैक्टीरिया पाए जाते हैं। यह स्थिति लगभग 2 से 10 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में देखी जाती है। यदि समय पर उपचार किया जाए, तो किडनी संक्रमण का खतरा 20 से 35% तक कम हो सकता है। डॉक्टरों का सुझाव है कि गर्भवती महिलाओं को यूरिन कल्चर टेस्ट कराना चाहिए ताकि बिना लक्षणों के भी UTI की पहचान की जा सके।


एक्यूट सिस्टाइटिस

American College of Obstetricians and Gynecologists के अनुसार, इस स्थिति में गर्भवती महिलाओं को पेशाब करते समय जलन और बार-बार मूत्र त्यागने की समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षणों पर डॉक्टर आमतौर पर यूरिन कल्चर जांच कराने की सलाह देते हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही दवाओं का चयन करना चाहिए, क्योंकि बिना जांच के दवाएं देने से बैक्टीरिया में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। इस संक्रमण का उपचार सामान्यतः 5 से 7 दिनों तक एंटीबायोटिक कोर्स से किया जाता है।


पायलोनेफ्राइटिस

गर्भावस्था के दौरान UTI की यह स्थिति गंभीर हो सकती है, जिसके लिए अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक हो सकता है। ACOG की रिपोर्ट के अनुसार, यदि महिला को 100.4°F या उससे अधिक बुखार, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, मतली और उल्टी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस स्थिति में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, और उपचार के लिए IV एंटीबायोटिक दिया जाता है, जिसे बाद में मौखिक दवाओं पर स्विच किया जा सकता है।


बार-बार होने वाला इंफेक्शन

यदि गर्भवती महिलाओं को दो या अधिक बार UTI होता है, तो इसे बार-बार होने वाला इंफेक्शन माना जाता है। ACOG की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्थिति में महिलाओं को पूरी गर्भावस्था के दौरान रात में कम खुराक वाली एंटीबायोटिक लेने की सलाह दी जाती है।


प्रेग्नेंसी में UTI के कारण

- प्रोजेस्टेरोन हार्मोन पेशाब की नलियों को ढीला करता है, जिससे UTI का खतरा बढ़ता है।


- गर्भावस्था के दौरान यूटरेस का बढ़ना ब्लैडर पर दबाव डालता है, जिससे पेशाब पूरी तरह से नहीं निकल पाता।


- कई बार गर्भवती महिलाएं पेशाब रोकती हैं, जिससे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं।


प्रेग्नेंसी में UTI के लक्षण

- पेशाब करते समय जलन।


- बार-बार थोड़ी मात्रा में पेशाब जाना।


- यूरिन का रंग हल्का लाल या गहरा गुलाबी होना।


- बार-बार पेशाब जाने की इच्छा।


- पेल्विक क्षेत्र में दर्द या भारीपन।


प्रेग्नेंसी में UTI से बचाव के उपाय

- गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से हाथ धोना और प्राइवेट पार्ट की सफाई रखना चाहिए।


- पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है।


- नियमित रूप से पेशाब करना चाहिए।


- डिलीवरी से पहले बिना लक्षणों वाले इंफेक्शन की स्क्रीनिंग कराना आवश्यक है।