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बलूचिस्तान में महिला कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

बलूचिस्तान में महिला कार्यकर्ता सैयद बीबी की गिरफ्तारी ने मानवाधिकार संगठनों की चिंता को बढ़ा दिया है। इन संगठनों ने इसे राजनीतिक दमन का एक उदाहरण बताया है और इसे 'पाकिस्तानी फासीवाद' की चरम सीमा करार दिया है। बीवाईसी का कहना है कि सैयद बीबी को बिना कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार किया गया, जबकि वह प्रशासन के निर्देशों का पालन कर रही थीं। इस मामले में कई संगठनों ने सैयद बीबी की तत्काल रिहाई की मांग की है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
 

महिला कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर मानवाधिकार संगठनों की चिंता

क्वेटा: बलूचिस्तान में महिला कार्यकर्ता और बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की सदस्य सैयद बीबी की गिरफ्तारी पर कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इन संगठनों ने इसे शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ बढ़ते दमन का एक उदाहरण बताया है, जिसे उन्होंने 'पाकिस्तानी फासीवाद' की चरम सीमा करार दिया।


बीवाईसी के अनुसार, सैयद बीबी को 1 जुलाई को पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) द्वारा उनके घर से बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार किया गया। संगठन का कहना है कि उनके नाम को आतंकवाद-रोधी कानून की 'फोर्थ शेड्यूल' सूची में शामिल किया गया है, लेकिन वह पिछले चार महीनों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए हर सप्ताह सीटीडी कार्यालय में हाजिरी दे रही थीं।


बीवाईसी ने यह भी आरोप लगाया कि केच के तुर्बत क्षेत्र में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की घोषणा के बाद, सीटीडी अधिकारियों ने सैयद बीबी को कई बार फोन कर परेशान किया।


संगठन ने कहा, "आतंकवाद-रोधी कानून की 'फोर्थ शेड्यूल' व्यवस्था का उपयोग बलूचिस्तान में राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्रों, शिक्षकों और आम नागरिकों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए किया जा रहा है। इस कानून के कारण कई छात्र अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं और विरोध प्रदर्शनों की घोषणा होते ही सूचीबद्ध लोगों को सीटीडी कार्यालय बुलाकर पूछताछ और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।"


बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) ने भी सैयद बीबी की गिरफ्तारी पर चिंता जताते हुए कहा कि यह पिछले कुछ वर्षों से उनके खिलाफ जारी कथित उत्पीड़न और डराने-धमकाने की कार्रवाई का हिस्सा है।


एचआरसीबी के अनुसार, "पिछले दो वर्षों में सैयद बीबी को कई बार दंडात्मक कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा। वर्ष 2025 में आतंकवाद से जुड़े किसी मामले में सार्वजनिक रूप से दोषसिद्धि न होने के बावजूद उनका नाम पाकिस्तान की 'फोर्थ शेड्यूल' निगरानी सूची में शामिल कर दिया गया।"


संगठन ने यह भी दावा किया कि मार्च 2026 में कथित तौर पर खुफिया एजेंसियों से जुड़े सादे कपड़ों में आए लोगों ने बिना वारंट उनके घर की तलाशी ली और परिसर में तोड़फोड़ की।


एचआरसीबी का कहना है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि बीवाईसी से जुड़े या उसके समर्थक माने जाने वाले लोगों के खिलाफ कथित तौर पर चलाए जा रहे व्यापक और व्यवस्थित अभियान का हिस्सा है।


बलूच महिला फोरम (बीडब्ल्यूएफ) ने भी गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा, "शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से किसी व्यक्ति को हिरासत में लेना व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी, संगठन बनाने के अधिकार और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।"


बीडब्ल्यूएफ ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक समुदाय से सैयद बीबी की तत्काल रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए हस्तक्षेप की अपील की। साथ ही संगठन ने आतंकवाद-रोधी कानूनों के कथित दुरुपयोग पर निगरानी रखने और पाकिस्तान से घरेलू कानूनों एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के पालन की मांग करने का भी आग्रह किया।


वहीं, बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के अध्यक्ष नसीम बलूच ने आरोप लगाया कि सैयद बीबी की गिरफ्तारी बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी के बढ़ते मामलों की एक और कड़ी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और पाकिस्तान पर जबरन गुमशुदगी की घटनाएं रोकने के लिए दबाव बनाए।"