बुजुर्गों में इन्फ्लूएंजा वैक्सीनेशन की कमी: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
इन्फ्लूएंजा वायरस और इसके प्रभाव
इन्फ्लूएंजा वायरस, जिसे आमतौर पर फ्लू कहा जाता है, एक श्वसन संबंधी संक्रमण है। यह वायरस नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह बीमारी खांसने और छींकने के माध्यम से फैलती है। भारत में हर साल लगभग 1.2 लाख लोग इस संक्रमण के कारण अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से अधिकांश की उम्र 65 वर्ष या उससे अधिक होती है।
बुजुर्गों में वैक्सीनेशन की स्थिति
Indian Academy of Geriatrics द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, केवल 2% से कम बुजुर्ग इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लेते हैं। Longitudinal Ageing Study in India (LASI) के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में बुजुर्गों के टीकाकरण की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में विभिन्न टीकों की कवरेज 3% से भी कम है।
बुजुर्गों में वैक्सीनेशन दर
टिटनेस और डिप्थीरिया वैक्सीन लेने वाले बुजुर्गों की संख्या 2.75% है। हेपेटाइटस बी वैक्सीन लेने वाले केवल 1.82% हैं, जबकि इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लेने वाले 1.59% और न्यूमोकोकल वैक्सीन लेने वाले 0.74% हैं।
टीकाकरण की कमी के कारण
इंद्रपस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टर सुरनजीत चटर्जी का कहना है कि भारत में बुजुर्गों के टीकाकरण की दर बहुत कम है, और इसे बढ़ाने की आवश्यकता है। टीकाकरण एक प्रकार का निवेश है जो बीमारियों और अस्पताल में भर्ती होने से बचाता है। स्वास्थ्य संस्थानों, सरकार और अन्य एजेंसियों को मिलकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि संक्रमण के कारण बुजुर्गों की अस्पताल में भर्ती होने की दर अधिक है, जिसमें निमोनिया सबसे सामान्य बीमारी है। इसके बावजूद, केवल 1% बुजुर्गों ने निमोनिया का टीका लगवाया है।
शोध में यह भी सामने आया है कि हर साल निमोनिया से 6 से 8 लाख लोगों की मौत होती है, जिनमें से अधिकांश बुजुर्ग होते हैं या पहले से किसी बीमारी से ग्रसित होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीनेशन के प्रति जागरूकता की कमी, वैक्सीन लगवाने में हिचकिचाहट और वैक्सीनेशन का खर्च जैसे कारण बुजुर्गों में टीकाकरण की दर को कम कर रहे हैं।
बुजुर्गों के लिए आवश्यक टीके
बुजुर्गों को इन्फ्लूएंजा, निमोनिया, शिंगल्स, टिटनस, डिप्थीरिया और पर्टुसिस की वैक्सीन लगवानी चाहिए। विशेष रूप से, उन बुजुर्गों को हेपेटाइटस बी की वैक्सीन लगवानी चाहिए, जिन्हें संक्रमण का खतरा अधिक है।