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बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत में भारी वृद्धि, 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना में लागत में भारी वृद्धि हुई है, जो अब 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। चार साल की देरी के कारण यह वृद्धि हुई है। रेलवे बोर्ड ने इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी बताया है। परियोजना की प्रगति 55.6% भौतिक और 69.6% वित्तीय है। रेल मंत्री ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सुरंग का निरीक्षण किया है। जानें इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में और क्या योजनाएं हैं।
 

बुलेट ट्रेन परियोजना में लागत वृद्धि

अहमदाबाद: देश की पहली और सबसे महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना, जो अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत चल रही है, के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। इस परियोजना में चार साल से अधिक की देरी के कारण लागत में भारी इजाफा हुआ है। पहले इसे लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसकी अनुमानित लागत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो कि प्रारंभिक स्वीकृत राशि से लगभग 83 प्रतिशत अधिक है।


रेलवे बोर्ड द्वारा लागत में वृद्धि की पुष्टि


सरकार की 'प्रगति' पहल के तहत आयोजित एक ब्रीफिंग में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सतीश कुमार ने बताया कि संशोधित लागत पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है, लेकिन नया आंकड़ा 1.98 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। लागत के पुनरीक्षण का कार्य जारी है और उम्मीद है कि इसे अगले एक-दो महीनों में अंतिम रूप दिया जाएगा। इस परियोजना में देरी और बजट में वृद्धि के पीछे भूमि अधिग्रहण में समस्याएं, कानूनी मंजूरियों में समय और ट्रेनों के चयन में हुई देरी को मुख्य कारण बताया गया है।


परियोजना की प्रगति


रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, 30 नवंबर तक इस परियोजना का भौतिक कार्य 55.6% और वित्तीय प्रगति 69.6% पूरी हो चुकी है। अब तक इस पर 85,801 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रेल मंत्रालय के कार्यों की समीक्षा की थी और इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए थे।


पालघर में सुरंग का निरीक्षण


लागत में वृद्धि की खबरों के बीच, परियोजना ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी पार किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महाराष्ट्र के पालघर जिले में 1.5 किलोमीटर लंबी पर्वतीय सुरंग के 'ब्रेकथ्रू' का निरीक्षण किया। यह सुरंग विरार और बोईसर स्टेशनों के बीच स्थित है और इसे 'माउंटेन टनल-5' नाम दिया गया है। मंत्रालय ने इसे इंजीनियरिंग का एक बड़ा उदाहरण बताया है। इससे पहले सितंबर 2025 में ठाणे और बीकेसी के बीच 5 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का कार्य भी पूरा किया गया था।


भविष्य की योजनाएं


बुलेट ट्रेन को 320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। भविष्य में इस ट्रैक पर जापान की आधुनिक E10 सीरीज शिंकानसेन ट्रेनें भी चलेंगी। पर्यावरण के दृष्टिकोण से, यह परियोजना सड़क परिवहन की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में 95% की कमी लाने में सहायक होगी। योजना के अनुसार, सूरत से बिलीमोरा के बीच का पहला चरण अगस्त 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है, जबकि पूरा 508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर दिसंबर 2029 तक तैयार हो जाएगा।