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ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन: नवजातों के लिए जीवनदायिनी पहल

ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन नवजात शिशुओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो उन्हें जीवनदायिनी पोषण प्रदान करती है। इस प्रक्रिया में स्वस्थ माताएं अपने अतिरिक्त दूध को दान कर सकती हैं, जिससे समय से पहले जन्मे और बीमार बच्चों को मदद मिलती है। जानें कि कौन महिलाएं दूध डोनेट कर सकती हैं, इसकी प्रक्रिया क्या है, और इसे सुरक्षित रूप से कैसे स्टोर किया जा सकता है।
 

ब्रेस्ट मिल्क का महत्व

नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध सबसे उत्तम और सुरक्षित आहार माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे की इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं और उन्हें संक्रमण से बचाते हैं। हालांकि, कुछ माताएं स्वास्थ्य समस्याओं, समय से पहले डिलीवरी या अन्य कारणों से अपने बच्चों को पर्याप्त स्तनपान नहीं करा पातीं। ऐसे में ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन कई नवजातों के लिए एक वरदान साबित होता है।


ज्वाला गुट्टा का योगदान

बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने एक साल में 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क दान किया है और अन्य महिलाओं से भी इस दिशा में आगे आने की अपील की है। यह जानना जरूरी है कि कौन सी महिलाएं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं और इसे कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। इस विषय पर हमने गुड़गांव के क्लाउडनाइन अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चेतना जैन से चर्चा की।


कौन कर सकती हैं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट?

स्वस्थ स्तनपान कराने वाली महिलाएं, जिनके शरीर में दूध की पर्याप्त मात्रा हो, ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं। इसके लिए कुछ आवश्यक शर्तें हैं:


  • महिला पूरी तरह स्वस्थ हो।
  • कोई गंभीर संक्रमण या संक्रामक बीमारी न हो।
  • एचआईवी, हेपेटाइटिस B/C, सिफलिस जैसी बीमारियों की जांच नेगेटिव हो।
  • धूम्रपान, शराब या नशीले पदार्थों का सेवन न करती हो।
  • डॉक्टर द्वारा प्रतिबंधित दवाइयों का सेवन न कर रही हो।
  • बच्चे की उम्र सामान्यतः 6 महीने से कम हो तो दूध की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
  • डोनर मां की मेडिकल हिस्ट्री और ब्लड टेस्ट के बाद ही दूध स्वीकार किया जाता है।


ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन की प्रक्रिया

ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखना आवश्यक है।


कुछ महत्वपूर्ण बातें:


  • हाथों की सफाई: दूध निकालने से पहले कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं।
  • ब्रेस्ट पंप की सफाई: पंप के सभी हिस्सों को हर बार गर्म पानी और साबुन से साफ करें।
  • सही कंटेनर का उपयोग: दूध को केवल स्टरलाइज्ड और फूड-ग्रेड कंटेनर में रखें।
  • एक्सपायरी और स्टोरेज टाइम लिखें: दूध निकालने की तारीख और समय कंटेनर पर लिखना जरूरी है।
  • बीमारी में डोनेट न करें: अगर मां को बुखार या संक्रमण हो तो दूध डोनेट नहीं करना चाहिए।
  • संतुलित आहार लें: डोनर मां को पौष्टिक भोजन और पर्याप्त पानी लेना चाहिए।


ब्रेस्ट मिल्क को कितने दिन तक स्टोर कर सकते हैं?

ब्रेस्ट मिल्क की सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सही तापमान पर स्टोर करना आवश्यक है।


सामान्य स्टोरेज गाइडलाइन:


  • कमरे के तापमान (25°C तक): लगभग 4 घंटे
  • रेफ्रिजरेटर (4°C): 3–4 दिन
  • फ्रीजर (-18°C या उससे कम): लगभग 6 महीने तक सुरक्षित
  • डीप फ्रीजर: 6–12 महीने तक


ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन की प्रक्रिया

भारत में कई अस्पताल और ह्यूमन मिल्क बैंक ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रक्रिया सामान्यतः इस प्रकार होती है:


  1. रजिस्ट्रेशन: डोनर मां को मिल्क बैंक या अस्पताल में रजिस्ट्रेशन करवाना होता है।
  2. हेल्थ स्क्रीनिंग: मां की मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है और कुछ ब्लड टेस्ट किए जाते हैं।
  3. दूध निकालना: मां घर पर या अस्पताल में स्वच्छ तरीके से दूध निकाल सकती है।
  4. स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट: दूध को सही तापमान पर स्टोर करके मिल्क बैंक तक पहुंचाया जाता है।
  5. पाश्चराइजेशन: मिल्क बैंक में दूध को पाश्चराइज किया जाता है।


ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन का महत्व

ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है। यह संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा कम करता है और नवजात की इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है।


निष्कर्ष: ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन एक संवेदनशील पहल है जो कई नवजात बच्चों को स्वस्थ जीवन देने में मदद करती है।