भारत ने अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ उठाई आवाज़, कानूनी चुनौती की तैयारी
भारत की कानूनी चुनौती
वाशिंगटन: भारत अगले सप्ताह अमेरिका द्वारा प्रस्तावित टैरिफ के खिलाफ एक समन्वित कानूनी चुनौती पेश करने जा रहा है। सरकारी अधिकारियों और प्रमुख उद्योग संगठनों का मानना है कि वॉशिंगटन द्वारा जबरन श्रम के संबंध में किए गए निष्कर्ष कानूनी रूप से कमजोर हैं और पर्याप्त साक्ष्यों पर आधारित नहीं हैं। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपूर्ति श्रृंखलाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सुनवाई की तारीख और गवाह
यह चुनौती 8 जुलाई को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) की सेक्शन 301 कमेटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई) की पूर्णिमा शेनॉय और कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) की शुचिता सोनालिका इस पैनल में गवाही देंगी। इसके बाद वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के डॉ. बृज मोहन और एपीईडीए के शुभम अरोड़ा भी गवाही देंगे।
यूएसटीआर का प्रस्ताव
यह सुनवाई यूएसटीआर के उस प्रस्ताव के संदर्भ में हो रही है जिसमें भारत से आयात पर 12.5 प्रतिशत की अतिरिक्त ड्यूटी लगाने की बात की गई है। यह जांच यह सुनिश्चित करेगी कि क्या भारत जबरन श्रम से बने सामान के निर्यात पर रोक लगाता है और इसे प्रभावी तरीके से लागू करता है।
भारत का कानूनी ढांचा
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने यूएसटीआर के निष्कर्षों को खारिज कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि भारत में एक मजबूत कानूनी ढांचा है जो जबरन श्रम के खिलाफ प्रभावी उपाय करता है।
सीआईआई का तर्क
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री ने इस प्रस्ताव के खिलाफ एक विस्तृत कानूनी और आर्थिक तर्क प्रस्तुत किया है। सीआईआई का कहना है कि भारत का पॉलिसी फ्रेमवर्क भेदभावपूर्ण नहीं है और यह संविधान के आर्टिकल 23 के तहत सुरक्षित है।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के मानक
सीआईआई ने यह भी बताया कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के प्रमुख समझौतों को अनुमोदित किया है और जबरन श्रम के खिलाफ ठोस कदम उठाए हैं।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सीआईआई का कहना है कि प्रस्तावित अतिरिक्त ड्यूटी से अमेरिकी निर्माताओं की लागत बढ़ेगी और इससे भारतीय उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
एफआईसीसीआई और एसीएमए की प्रतिक्रिया
एफआईसीसीआई ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया है, यह कहते हुए कि भारतीय एक्सपोर्ट सप्लाई चेन पहले से ही एक मजबूत कम्प्लायंस फ्रेमवर्क के तहत काम कर रही है। एसीएमए ने भी कहा है कि अतिरिक्त ड्यूटी से ऑटोमोटिव उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
भारत का तर्क
भारत का कहना है कि उसके कानूनी सुरक्षा उपाय पहले से ही जबरन श्रम के खिलाफ मजबूत हैं और प्रस्तावित टैरिफ अनावश्यक है।