मछलियों में फैलने वाला दुर्लभ कैंसर: नई खोज ने वैज्ञानिकों को चौंकाया
कैंसर की नई परिभाषा
नई दिल्ली: कैंसर को आमतौर पर एक ऐसी बीमारी माना जाता है जो किसी एक जीव के शरीर में उत्पन्न होती है और वहीं फैलती है। लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक अनोखी घटना का पता लगाया है, जिसने इस धारणा को चुनौती दी है। एक नई अध्ययन में यह सामने आया है कि कुछ मछलियों में कैंसर की कोशिकाएं एक मछली से दूसरी मछली में स्थानांतरित होकर वहां भी विकसित हो सकती हैं। इस खोज ने वैज्ञानिकों और वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों के बीच चिंता का विषय बना दिया है.
ब्राउन बुलहेड कैटफिश में कैंसर की पहचान
इस अध्ययन के दौरान, वैज्ञानिकों ने अमेरिका के वर्मोंट और कनाडा के क्यूबेक के बीच स्थित लेक मेम्फ्रेमागॉग में ब्राउन बुलहेड कैटफिश में इस प्रकार के कैंसर की पहचान की। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मछलियों में पाया गया पहला ज्ञात ट्रांसमिसिबल कैंसर है, जो एक जीव से दूसरे जीव में फैलता है। यह मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र में इस तरह का पहला मामला है.
वैज्ञानिकों की व्याख्या
वैज्ञानिकों ने क्या बताया?
वैज्ञानिकों का कहना है कि सामान्य कैंसर स्वस्थ कोशिकाओं में आनुवंशिक परिवर्तन के कारण उत्पन्न होता है और उसी शरीर में फैलता है। जबकि ट्रांसमिसिबल कैंसर में कैंसर की जीवित कोशिकाएं एक जीव से दूसरे जीव में पहुंचकर वहां भी बढ़ने लगती हैं, जिससे यह एक अलग और दुर्लभ प्रकार का कैंसर बन जाता है.
जांच के निष्कर्ष
जांच में क्या पाया गया?
शोधकर्ताओं ने प्रभावित मछलियों के ट्यूमर और स्वस्थ ऊतकों के जीनोम का विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि विभिन्न मछलियों के ट्यूमर आनुवंशिक रूप से लगभग समान थे, जबकि उनके स्वस्थ ऊतकों से पूरी तरह भिन्न थे। इससे यह संकेत मिला कि सभी ट्यूमर एक ही मूल कैंसर सेल लाइन से उत्पन्न हुए हैं.
कैसे फैलता है कैंसर?
कैसे फैलता है ये कैंसर?
वैज्ञानिक अभी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यह कैंसर एक मछली से दूसरी मछली तक कैसे पहुंचता है। उनका मानना है कि प्रजनन के मौसम में मछलियों का एकत्र होना इसका एक कारण हो सकता है। इसके अलावा, पानी, गलफड़ों, त्वचा या झील की तलहटी की मिट्टी के माध्यम से भी कैंसर कोशिकाओं के फैलने की संभावना है, लेकिन इन रास्तों की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है.
इंसानों पर प्रभाव
शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि इस कैंसर के इंसानों में फैलने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। यह अध्ययन केवल ब्राउन बुलहेड कैटफिश पर आधारित है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इंसानों की प्रतिरक्षा प्रणाली बाहरी कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट कर देती है, इसलिए लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, इस दुर्लभ कैंसर को समझने के लिए आगे भी शोध जारी रहेगा.