मसूड़ों की सेहत: खून आने के संकेत और बचाव के उपाय
मसूड़ों से खून आना: एक गंभीर संकेत
हेल्थ डेस्क, 05 अप्रैल। कई भारतीय दांतों की सफाई करते समय ब्रश के ब्रिसल्स पर गुलाबी रंग या खून देखकर इसे सामान्य मान लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह मसूड़ों की खराब सेहत का पहला और स्पष्ट संकेत है। मसूड़ों से खून आना असल में 'प्लाक' के कारण होता है, जो दांतों की रेखा पर बैक्टीरिया की एक चिपचिपी परत है। जब हम नियमित सफाई में लापरवाही बरतते हैं, तो यह परत मसूड़ों में जलन पैदा करती है, जिससे वे लाल और सूजे हुए हो जाते हैं और हल्का छूने पर भी खून निकलने लगता है।
जिंजिवाइटिस से पीरियडोंटाइटिस का खतरा
इस प्रारंभिक स्थिति को चिकित्सा में 'जिंजिवाइटिस' कहा जाता है। अच्छी बात यह है कि सही सफाई और चिकित्सकीय सलाह से इसे ठीक किया जा सकता है। समस्या तब बढ़ती है जब लोग इसे नजरअंदाज करते हैं और यह 'पीरियडोंटाइटिस' में बदल जाता है। यह एक गंभीर संक्रमण है जिसमें बैक्टीरिया दांतों को सहारा देने वाली हड्डियों और ऊतकों पर हमला करते हैं। इस स्थिति में दांतों को होने वाला नुकसान अक्सर स्थायी होता है और दांत गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
मसूड़ों की बीमारी के अन्य कारण
मसूड़ों से खून आने के पीछे केवल सफाई की कमी नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और आहार भी जिम्मेदार हैं। भारतीय आहार में अक्सर विटामिन सी और के की कमी होती है, जो रक्त के थक्के जमने और मसूड़ों की मरम्मत के लिए आवश्यक हैं। इसके अलावा, भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देती है और मसूड़ों के संक्रमण को बढ़ा देती है। महिलाओं में गर्भावस्था, मासिक धर्म और मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोनल बदलाव भी मसूड़ों को संवेदनशील बना देते हैं।
दवाएं और तंबाकू का प्रभाव
कुछ सामान्य दवाएं जैसे एस्पिरिन और उच्च रक्तचाप की दवाएं भी रक्तस्राव की प्रवृत्ति को बढ़ा सकती हैं। तंबाकू का प्रभाव सबसे घातक होता है, चाहे वह सिगरेट के रूप में हो या चबाने वाले गुटखे के रूप में। तंबाकू मसूड़ों में रक्त के प्रवाह को कम कर देता है, जिससे बीमारी के लक्षण छिप जाते हैं और समस्या तब सामने आती है जब वह गंभीर हो चुकी होती है। यदि मसूड़े दांतों से अलग हो रहे हैं या मुँह से लगातार बदबू आ रही है, तो यह कैंसर या रक्त विकार जैसे गंभीर रोगों का संकेत हो सकता है।
बचाव के उपाय और डॉक्टर से कब मिलें
दांतों की उम्र बढ़ाने के लिए दिन में दो बार सॉफ्ट ब्रश से गोल-गोल घुमाकर सफाई करें। आक्रामक तरीके से रगड़ने से मसूड़ों को नुकसान हो सकता है। अपने आहार में आंवला, अमरूद और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें ताकि विटामिन की कमी पूरी हो सके। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दर्द होने का इंतजार न करें। अधिकांश लोग केवल तभी डेंटिस्ट के पास जाते हैं जब दर्द असहनीय हो जाता है, जबकि हर छह महीने में रूटीन चेकअप आपको भविष्य की बड़ी सर्जरी और खर्चों से बचा सकता है।