महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर: लक्षण और बचाव के उपाय
सर्वाइकल कैंसर का खतरा और लक्षण
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसके बाद ब्रेस्ट कैंसर का स्थान आता है। इसके खिलाफ वैक्सीनेशन उपलब्ध है, लेकिन जानकारी की कमी के कारण हर साल कई महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं। सर्वाइकल कैंसर की सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह प्रारंभिक चरण में बिना किसी चेतावनी के विकसित होता है। हालांकि, इसका इलाज संभव है, क्योंकि इसके लिए वैक्सीन उपलब्ध है। समय पर टीकाकरण, नियमित स्क्रीनिंग और प्रारंभिक लक्षणों की पहचान से इसे रोका और ठीक किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सर्वाइकल कैंसर का पता जल्दी चल जाए, तो इसका सफल उपचार संभव है। लेकिन समस्या यह है कि प्रारंभिक लक्षण अक्सर सामान्य होते हैं, जिससे महिलाएं उन्हें पहचान नहीं पातीं या अनदेखा कर देती हैं। विशेष रूप से 30 से 35 वर्ष की आयु की महिलाओं में इसका जोखिम अधिक होता है। इसलिए, इसके छिपे हुए संकेतों को समय पर समझना आवश्यक है।
सर्वाइकल कैंसर के साइलेंट लक्षण
- पीरियड्स के बीच या यौन संबंध के बाद रक्तस्राव।
- असामान्य या बदबूदार योनि डिस्चार्ज।
- पेल्विक या निचले पीठ में लगातार दर्द।
- यौन संबंध के दौरान अत्यधिक दर्द।
- बार-बार थकान और कमजोरी का अनुभव।
- वजन में अचानक कमी।
- भारी पीरियड्स के दौरान अधिक रक्तस्राव।
- बार-बार पेशाब आना।
- अचानक भूख में कमी।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सर्वाइकल कैंसर कई प्रकार के एचपीवी वायरस के कारण होता है, इसलिए इससे बचने के लिए वैक्सीन लगवाना आवश्यक है। ये लक्षण सर्वाइकल कैंसर के ही हों, ऐसा जरूरी नहीं है, लेकिन डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, पैप स्मीयर या एचपीवी टेस्ट के बारे में भी डॉक्टर से चर्चा करें। याद रखें कि समय पर जांच और सही उपचार से इस कैंसर को ठीक किया जा सकता है।