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माइक्रोग्रीन्स: स्वास्थ्य के लिए लाभकारी और घर पर उगाने की विधि

माइक्रोग्रीन्स का चलन भारत में तेजी से बढ़ रहा है, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि इन्हें उगाकर अच्छी कमाई भी की जा सकती है। ये छोटे पत्ते पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। जानें माइक्रोग्रीन्स के फायदे, इन्हें अपनी डाइट में कैसे शामिल करें, और घर पर इन्हें उगाने की सरल विधि।
 

माइक्रोग्रीन्स का बढ़ता ट्रेंड

भारत में माइक्रोग्रीन्स की खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ये न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं, बल्कि लोग इन्हें उगाकर अच्छी कमाई भी कर रहे हैं। बाजार में इनकी कीमतें काफी ऊंची हैं। ये छोटे आकार के होते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है। ये हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक होते हैं।


डाइटिशियन से जानें माइक्रोग्रीन्स के फायदे

हमने माइक्रोग्रीन्स के बारे में डाइटिशियन और न्यूट्रीप्लस की निदेशक डॉक्टर अंजलि फाटक से बातचीत की। आइए जानते हैं कि इन्हें अपनी डाइट में कैसे शामिल किया जा सकता है और इनके सेवन के क्या लाभ हैं।


माइक्रोग्रीन्स क्या होते हैं?

"माइक्रोग्रीन्स एक नया कॉन्सेप्ट है। आमतौर पर हम लाल साग, मेथी, और पालक को तब खाते हैं जब वे अच्छे से उग जाते हैं। लेकिन माइक्रोग्रीन्स छोटे पत्तों का समूह होते हैं, जिन्हें 7 से 21 दिन के भीतर काट लिया जाता है। इन्हें पूरी तरह से विकसित नहीं होने दिया जाता। उदाहरण के लिए, बेबी कॉर्न में पौष्टिक तत्व अधिक होते हैं। इसी तरह, हरी सब्जियों के छोटे पत्ते भी माइक्रोग्रीन्स होते हैं।" - डाइटिशियन अंजलि फाटक


स्वास्थ्य के लिए लाभ

माइक्रोग्रीन्स में बायोएक्टिव यौगिकों की उच्च मात्रा होती है। इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। ये डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्छे होते हैं क्योंकि ये शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, ये वजन को भी नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।


कैसे करें सेवन?

आप माइक्रोग्रीन्स को सैंडविच, सूप, और सलाद में मिलाकर खा सकते हैं। कई बड़े रेस्टोरेंट्स में भी इनका उपयोग किया जा रहा है। इन्हें खरीदते समय ध्यान रखें कि ये बेबी प्लांट होते हैं और इनमें फंगल इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है। इसलिए इन्हें अच्छे फार्म से खरीदें। ये पूरी तरह से सुपरफूड नहीं हैं, लेकिन इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा माना जा सकता है।


किसे नहीं खाना चाहिए?

किडनी के मरीजों को फास्फोरस की मात्रा कम लेनी होती है, इसलिए उन्हें माइक्रोग्रीन्स से परहेज करना चाहिए। अल्सर से पीड़ित लोगों को भी इन्हें नहीं खाना चाहिए क्योंकि इनमें फाइबर की अधिकता होती है। जिन लोगों को अपच की समस्या है, उन्हें भी इनसे दूर रहना चाहिए। इसके अलावा, कमजोर इम्यूनिटी वाले और गर्भवती महिलाओं को भी इन्हें नहीं खाना चाहिए।


घर पर उगाने की विधि

आप एक ट्रे या डिब्बे में मिट्टी की पतली परत बिछाएं। उसमें बीज डालें और हल्का पानी छिड़कें। पहले 2-3 दिन ट्रे को ढककर रखें। जब अंकुर निकल आएं, तो इसे हल्की धूप में रखें। 7 से 14 दिन के भीतर पत्तियां उग जाएंगी। इन्हें अच्छे से धोकर काटकर इस्तेमाल करें। ध्यान रखें कि गंदे पानी में इन्हें उगाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।


साफ-सफाई का ध्यान रखें

अगर आप घर पर माइक्रोग्रीन्स उगा रहे हैं, तो साफ-सफाई का ध्यान रखना आवश्यक है। हमेशा साफ पानी का उपयोग करें और इन्हें ऑर्गेनिक तरीके से उगाएं।


माइक्रोग्रीन्स की तस्वीर