मार्जरी आसन: कमर और गर्दन के दर्द से राहत पाने का प्रभावी उपाय
मार्जरी आसन का महत्व
ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने से कमर और गर्दन पर काफी दबाव पड़ता है। इसके अलावा, स्क्रीन की ओर झुककर काम करने से पीठ में अकड़न, कमर दर्द और गर्दन में जकड़न जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। थोड़ी सी लापरवाही से ये समस्याएं बढ़ सकती हैं। इनसे बचने के लिए संतुलित आहार के साथ नियमित व्यायाम करना आवश्यक है.
मार्जरी आसन का अभ्यास
इन समस्याओं से राहत पाने के लिए 'मार्जरी आसन' एक प्रभावी योगासन है। इसे मार्जरासन या बिल्ली आसन भी कहा जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, पीठ के तनाव को कम करता है और कमर तथा गर्दन के दर्द में राहत प्रदान करता है.
आयुष मंत्रालय की सलाह
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मार्जरी आसन (बिल्ली मुद्रा) रीढ़ की हड्डी को लचीला, मजबूत और स्वस्थ बनाने में मदद करता है। यह आसन बिल्ली की तरह पीठ को मोड़ने वाली मुद्रा है, जो रीढ़ की मांसपेशियों को आराम देती है, पाचन में सुधार करती है और थायराइड के लिए भी लाभकारी मानी जाती है.
दर्द से राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना कुछ मिनट मार्जरी आसन करने से दर्द से राहत मिल सकती है। इस आसन के दौरान शरीर बिल्ली की मुद्रा में होता है, और रीढ़ की हड्डी को लहर की तरह आगे-पीछे हिलाया जाता है, जिससे स्पाइन लचीला और मजबूत बनता है.
आयुर्वेदिक लाभ
आयुर्वेद के अनुसार, इस आसन का नियमित अभ्यास लंबर पेन और सायटिका में राहत देता है। गर्दन और कंधों की जकड़न कम होती है, सर्वाइकल पेन में आराम मिलता है। यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, स्पॉन्डिलाइटिस में लाभकारी होता है, और पेट की चर्बी कम करने में मदद करता है.
सावधानी
हालांकि, किसी भी प्रकार के ज्वाइंट पेन से पीड़ित व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.