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मेनोपॉज और हृदय स्वास्थ्य: समय से पहले मेनोपॉज का खतरा

महिलाओं में मेनोपॉज एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यदि यह सामान्य उम्र से पहले हो जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हाल ही में एक अध्ययन में पाया गया है कि समय से पहले मेनोपॉज का अनुभव करने वाली महिलाओं में हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। भारत में भी, बड़ी संख्या में महिलाएं समय से पहले मेनोपॉज का सामना कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी से हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस लेख में मेनोपॉज के स्वास्थ्य प्रभावों और इससे जुड़े जोखिमों पर चर्चा की गई है।
 

महिलाओं में मेनोपॉज का प्रभाव


नई दिल्ली: महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि यह सामान्य उम्र से पहले शुरू हो जाए तो इसके गंभीर स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह पाया गया है कि समय से पहले मेनोपॉज का सामना करने वाली महिलाओं में हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी महिलाओं को हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का अधिक जोखिम हो सकता है।


यह अध्ययन एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसमें 26 देशों की 1.11 लाख से अधिक महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के अनुसार, जिन महिलाओं में 40 से 44 वर्ष की आयु के बीच मेनोपॉज हुआ, उनमें सामान्य उम्र में मेनोपॉज होने वाली महिलाओं की तुलना में हृदय रोगों का खतरा 30 से 40 प्रतिशत अधिक पाया गया।


भारत में मेनोपॉज के आंकड़े

क्या कहते हैं आंकड़े?


भारत से संबंधित आंकड़े भी चिंताजनक हैं। अध्ययन में शामिल 7,872 भारतीय महिलाओं में से 1,445 यानी 18.4 प्रतिशत ने 40 वर्ष की आयु से पहले मेनोपॉज का अनुभव किया। इसके अलावा, 25.3 प्रतिशत महिलाओं में 40 से 44 वर्ष की आयु के बीच मेनोपॉज देखा गया। इस प्रकार, लगभग 43.6 प्रतिशत भारतीय महिलाओं में समय से पहले या कम उम्र में मेनोपॉज की स्थिति सामने आई।


विशेषज्ञों के अनुसार, मेनोपॉज से पहले महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन हृदय और रक्त वाहिकाओं की सुरक्षा करता है। यह हार्मोन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करता है। लेकिन मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से घटने लगता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। कई मामलों में महिलाओं में हार्ट अटैक का जोखिम पुरुषों के बराबर पहुंच जाता है।


अध्ययन के निष्कर्ष

अध्ययन में क्या आया सामने?


अध्ययन में यह भी पाया गया कि दक्षिण एशिया की महिलाओं में मेनोपॉज की औसत उम्र वैश्विक औसत से कम है। जहां दुनिया में मेनोपॉज की औसत उम्र 47.4 वर्ष है, वहीं दक्षिण एशिया में यह केवल 44.7 वर्ष है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियों को जन्म दे सकता है।


डॉक्टरों के अनुसार, तनाव, धूम्रपान, खराब खानपान, नींद की कमी, प्रदूषण, डायबिटीज और सेकेंड हैंड स्मोकिंग जैसे कारक समय से पहले मेनोपॉज के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, एनीमिया, कम उम्र में विवाह, बार-बार गर्भधारण और पोषण की कमी भी महत्वपूर्ण कारण माने जाते हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि महिलाओं में मेनोपॉज से जुड़े जोखिमों की पहचान के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और हृदय रोगों की स्क्रीनिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।