यूपी में प्रीपेड स्मार्ट मीटर के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शन
लखनऊ में स्मार्ट मीटर के खिलाफ प्रदर्शन
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटरों के कारण आ रहे भारी बिलों के खिलाफ लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन लोग स्मार्ट मीटरों को अपने घरों से निकालकर बिजली कार्यालयों पर फेंकते हुए नजर आ रहे हैं। कहीं महिलाएं मीटरों को सिर पर रखकर जुलूस निकाल रही हैं, तो कहीं लोग उन्हें जमीन पर पटककर अपना विरोध जता रहे हैं। सोशल मीडिया पर विभिन्न जिलों से ऐसे वीडियो लगातार वायरल हो रहे हैं। आगरा, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, मेरठ, हमीरपुर, हापुड़ और लखनऊ में इस मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं।
प्रीपेड स्मार्ट मीटरों के खिलाफ राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टियां जैसे समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने योगी सरकार के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। उल्लेखनीय है कि योगी सरकार ने 20 अप्रैल को राहत 1.0 की घोषणा की थी और एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था, जिसे 10 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। यह समय सीमा 30 अप्रैल को समाप्त हो गई, और अब लोग समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पहले राहत घोषणा में 2 किलोवाट तक के उपभोक्ताओं को तीन दिन का ग्रेस पीरियड दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ, जिसके चलते सरकार ने राहत 2.0 की घोषणा भी की थी।
सरकार ने 2 किलोवाट तक के उपभोक्ताओं को तीन दिन का ग्रेस पीरियड दिया था, लेकिन जब प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाते हैं, तो यह बिना उपभोक्ता की अनुमति के 3 किलोवाट में बदल जाता है। इस स्थिति में 2 किलोवाट तक के उपभोक्ताओं के लिए तीन दिन का ग्रेस पीरियड बेकार साबित होता है।
इसके अलावा, 1 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं को 30 दिन तक बिजली कनेक्शन नहीं काटने का आश्वासन दिया गया था। यानी उन्हें पोस्टपेड मोड में 30 दिन के भीतर रिचार्ज करना होगा, लेकिन 24 अप्रैल को दूसरी राहत की घोषणा के बावजूद लोगों में गुस्सा बरकरार है और प्रदर्शन जारी है।
उपभोक्ताओं और विपक्ष ने मिलकर इस मुद्दे पर मोर्चा संभाल रखा है। राज्य उपभोक्ता परिषद ने जबरन मीटर लगाने का आरोप लगाते हुए विद्युत नियामक आयोग से संपर्क किया है और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि लोग स्मार्ट मीटरों को तोड़कर फेंक रहे हैं और भाजपा की तकनीक पर भरोसा नहीं कर सकते।
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों की संख्या 75 लाख के करीब
उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 75 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि ये मीटर तेजी से चलते हैं और बिल अधिक आते हैं। प्रीपेड मीटर में बैलेंस जल्दी खत्म होता है। एक व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह कह रहा है कि उसके घर में कोई उपयोग नहीं हो रहा है, फिर भी बैलेंस कट रहा है।
जब 24 अप्रैल को 1 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 दिन का ग्रेस पीरियड घोषित किया गया, तो उम्मीद थी कि लोगों का गुस्सा कम होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 1 किलोवाट लोड श्रेणी में 42 लाख उपभोक्ता आते हैं, लेकिन अब उपभोक्ताओं की मांग है कि स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने मीटर वापस लगाए जाएं। RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत स्मार्ट मीटर लगाने की समय सीमा मार्च 2028 तक है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस विवाद के बीच सरकार को जल्दी क्या है?