योगाभ्यास की शुरुआत प्रार्थना से: आयुष मंत्रालय का महत्व
योग और प्रार्थना का संबंध
नई दिल्ली: योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाने की एक व्यापक प्रक्रिया है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग का असली लाभ तभी प्राप्त होता है जब इसे सकारात्मक सोच और सही मानसिकता के साथ शुरू किया जाए। इसलिए, योग की शुरुआत प्रार्थना से करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
प्रार्थना का महत्व
मंत्रालय का कहना है कि प्रार्थना मन को शांत करने का एक सरल और प्रभावी तरीका है। जब हम प्रार्थना करते हैं, तो हमारे बिखरे हुए विचार एकत्रित होते हैं, जिससे मन की चंचलता कम होती है और हम वर्तमान में लौट आते हैं। प्रार्थना के दौरान गहरी सांसें लेना शरीर को योगाभ्यास के लिए तैयार करता है।
योग 365 अभियान
योग 365 अभियान के तहत लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि वे अपनी योग मैट बिछाएं, प्रार्थना से दिन की शुरुआत करें और ध्यान और कृतज्ञता के साथ अभ्यास करें। इस अभियान का उद्देश्य योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर इसे पूरे वर्ष की दिनचर्या में शामिल करना है।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रार्थना से शुरू किया गया योग अधिक ध्यानपूर्ण होता है। जब हम अभ्यास से पहले कुछ क्षण रुकते हैं, गहरी सांस लेते हैं और सकारात्मक इरादा बनाते हैं, तो हमारा शरीर और मन दोनों योग के लिए तैयार हो जाते हैं। यह छोटा सा ठहराव हमें दिनभर की भागदौड़ से निकालकर योग के प्रति समर्पित होने में मदद करता है।
आयुष मंत्रालय की अपील
आयुष मंत्रालय ने लोगों से आग्रह किया है कि वे योगाभ्यास को जल्दबाजी में न करें। पहले प्रार्थना करें, मन को शांत करें, सकारात्मक संकल्प लें और फिर धीरे-धीरे योगाभ्यास में प्रवेश करें। प्रार्थना के साथ की गई यह शुरुआत ध्यानपूर्ण योग के लिए सही माहौल बनाती है और पूरे अभ्यास को अधिक फलदायी और सार्थक बनाती है।