राजा ब्लॉग के राजाकुमार बाबू की बेटी को हाइड्रोसेफलस, जानें लक्षण और इलाज
राजाकुमार बाबू की बेटी की स्वास्थ्य स्थिति
यूट्यूबर राजाकुमार बाबू, जिन्हें 'राजा ब्लॉग' के नाम से जाना जाता है, इस समय एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक वीडियो में बताया कि उनकी बेटी लड्डू को हाइड्रोसेफलस नामक गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा है। उनकी बेटी की हाल ही में सर्जरी हुई है, और उन्होंने अपने प्रशंसकों को सर्जरी के बाद लड्डू का चेहरा दिखाया है। प्रशंसक उसकी जल्दी स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। आइए, इस गंभीर बीमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
हाइड्रोसेफलस क्या है?
हाइड्रोसेफलस एक गंभीर मस्तिष्क की बीमारी है, जो 1000 में से एक या दो बच्चों को प्रभावित करती है। यह मुख्य रूप से बच्चों और बुजुर्गों में होती है। इस स्थिति में मस्तिष्क में सेरिब्रो स्पाइनल फ्ल्यूड की अधिकता हो जाती है, जिससे दिमाग का आकार बढ़ जाता है। इसे हाइड्रोसेफलस कहा जाता है, और यह जन्मजात या जन्म के बाद भी विकसित हो सकता है। हालांकि, इसका इलाज संभव है।
नवजात बच्चों में लक्षण
नवजात बच्चों में इस बीमारी के कुछ प्रमुख लक्षण होते हैं, जैसे कि:
- सिर का सामान्य से बड़ा होना
- दिमाग के ऊपरी हिस्से का अत्यधिक मुलायम होना
- उल्टी
- नींद की कमी
- थकान
- खाने में अरुचि
- दौरे आना
- आंखों का नीचे की ओर होना
- मांसपेशियों की कमजोरी
बड़े बच्चों में लक्षण
बड़े बच्चों में हाइड्रोसेफलस के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:
- सिरदर्द
- धुंधला या डबल दृष्टि
- सिर का आकार बढ़ना
- संतुलन बनाने में कठिनाई
- भूख की कमी
- उल्टी और चक्कर आना
- पेशाब पर नियंत्रण न रहना
- याददाश्त पर असर
बुजुर्गों में लक्षण
बुजुर्गों में हाइड्रोसेफलस के लक्षणों में शामिल हैं:
- पेशाब पर नियंत्रण न रहना
- याददाश्त की कमी
- चलने-फिरने में कठिनाई
- सोचने-समझने की क्षमता में कमी
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि बच्चा अत्यधिक रोने लगे, दूध पीने या खाने में कठिनाई हो, बिना कारण उल्टी हो रही हो, या दौरे पड़ रहे हों, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
हाइड्रोसेफलस का उपचार
इस गंभीर बीमारी का उपचार संभव है। डॉक्टर पहले कुछ परीक्षण करेंगे, जिनमें सीटी स्कैन, एमआरआई, लंबर पंचर (जिसमें डॉक्टर रीढ़ की हड्डी से सेरिब्रो फ्ल्यूड निकालते हैं), इंट्राक्रैनियल प्रेशर मापने के लिए परीक्षण, और आइसोटोप स्टेनोग्राफी शामिल हैं। इन सभी परीक्षणों के बाद ही उपचार शुरू किया जाता है।