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वियतनाम का अनोखा लव मार्केट: प्रेमियों की अद्भुत मुलाकात

वियतनाम के खाऊ वाई गांव में हर साल एक अनोखा लव मार्केट आयोजित होता है, जहां पुराने प्रेमी एक-दूसरे से मिलते हैं। यह बाजार न केवल प्रेमियों के लिए एक अद्भुत अनुभव है, बल्कि इसे सांस्कृतिक विरासत का दर्जा भी प्राप्त है। जानें इस बाजार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसकी अनोखी परंपरा के बारे में।
 

प्रेमियों के लिए खास बाजार

आपने विभिन्न प्रकार के बाजारों के बारे में सुना होगा, जैसे कपड़े, गहने, और गाड़ियों के। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा बाजार भी है, जहां पुराने प्रेमी वर्षों बाद एक-दूसरे से मिलते हैं? इस लेख में हम उस विशेष बाजार के बारे में चर्चा करेंगे, जो अधूरे प्यार को फिर से जोड़ने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।


वियतनाम का खाऊ वाई लव मार्केट

वियतनाम के उत्तरी पहाड़ियों में स्थित हा जियांग प्रांत का ‘खाऊ वाई’ गांव हर साल एक अनोखी लव मार्केट का आयोजन करता है। इस बाजार में कपड़े या घरेलू सामान नहीं, बल्कि पुराने प्रेमी एक-दूसरे से मिलने आते हैं। इसे खाऊ वाई लव मार्केट के नाम से जाना जाता है।


संस्कृति का आधिकारिक दर्जा

वियतनाम के संस्कृति मंत्रालय ने 2021 में खाऊ वाई को एक सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी थी।


एक्स से मिलना: धोखा नहीं

इस बाजार में पति-पत्नी एक साथ आते हैं और अपने पुराने प्रेमियों से मिलते हैं। दिलचस्प बात यह है कि अपने पूर्व प्रेमी से मिलना लोगों के लिए धोखे जैसा नहीं माना जाता। हालांकि, आजकल कई रिश्तों में यह भावना अंदर ही अंदर टूटने का कारण बन रही है। इसे एक अलग दृष्टिकोण से देखा जाता है, जहां कुछ कनेक्शन को सम्मान देने की आवश्यकता होती है।


लव मार्केट का आयोजन कब होता है?

हर साल अप्रैल और मई में खाऊ वाई में लव मार्केट का आयोजन होता है। वियतनामी कैलेंडर के अनुसार, यह बाजार तीसरे महीने के 27वें दिन लगता है। यह समय पहाड़ी क्षेत्रों में वसंत के अंत और गर्मियों की शुरुआत का होता है, जब लोग अपने कृषि कार्यों से मुक्त होकर इस बाजार में जाने का विचार करते हैं।


इसकी ऐतिहासिक मान्यता

यह बाजार सदियों पुराना है और इसकी शुरुआत 1919 में हुई थी। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, यह कहानी नुंग समुदाय के युवक ‘बा’ और गियाई समुदाय की युवती ‘उत’ से जुड़ी हुई है। ‘बा’ एक साधारण बांसुरी बजाने वाला लड़का था, जबकि 'उत' उस कबीले के सरदार की बेटी थी। उनका मिलन न हो पाने के कारण, दोनों ने तय किया कि वे हर साल चंद्र कैलेंडर के तीसरे महीने के 27वें दिन खाऊ वाई घाटी में मिलेंगे। तभी से इस बाजार की परंपरा शुरू हुई।