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सरकार ने गेहूं स्टॉक लिमिट को सख्त किया, जमाखोरी पर लगेगा अंकुश

सरकार ने गेहूं की स्टॉकिंग पर सख्ती करते हुए नए नियम लागू किए हैं, जिसका उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और कीमतों को नियंत्रित करना है। थोक और खुदरा विक्रेताओं के लिए स्टॉक लिमिट में बदलाव किया गया है। यह आदेश 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगा। जानें इस निर्णय के पीछे की वजह और गेहूं उत्पादन की स्थिति के बारे में।
 

सरकार का नया कदम


सरकार ने गेहूं की स्टॉकिंग पर सख्ती की है। यह कदम जमाखोरी को रोकने और गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब गेहूं की स्टॉक लिमिट को सख्त किया गया है।


त्योहारों से पहले की तैयारी

सरकार का निर्णय

खाद्य मंत्रालय ने बताया कि दिवाली जैसे त्योहारों के मद्देनजर गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करना आवश्यक है। इसी के तहत, केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक गेहूं की स्टॉक सीमा में बदलाव करने का निर्णय लिया है।


स्टॉक लिमिट का निर्धारण

स्टॉक लिमिट में बदलाव

सरकार ने थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं के लिए गेहूं की स्टॉकिंग लिमिट को सख्त किया है। थोक विक्रेताओं के लिए यह सीमा 3000 टन से घटाकर 2000 टन कर दी गई है। वहीं, खुदरा विक्रेताओं के लिए यह सीमा 10 टन से घटाकर 8 टन कर दी गई है।


आदेशों की वैधता

आदेशों की अवधि

सरकार के द्वारा जारी किए गए ये आदेश 31 मार्च 2026 तक मान्य रहेंगे। इससे पहले, 12 जून 2023 को स्टॉक सीमा लागू की गई थी, जो 31 मार्च 2024 तक प्रभावी रही।


गेहूं उत्पादन की स्थिति

उत्पादन का आंकड़ा

सरकार ने बताया कि देश में फसल वर्ष 2024-25 में 11.75 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। मंत्रालय का कहना है कि गेहूं की स्टॉक स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।