सर्दियों में पैरों की देखभाल: आयुर्वेदिक उपाय और महत्व
सर्दियों में पैरों की देखभाल का महत्व
नई दिल्ली: सर्दियों में ठंडी हवा और फर्श की ठंडक का प्रभाव सीधे शरीर पर पड़ता है, खासकर पैरों पर। यदि पैरों को गर्म और साफ नहीं रखा गया, तो नींद में बाधा, जकड़न, ऐंठन और दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, पैरों में लगभग 72,000 नाड़ियां होती हैं, जो शरीर के अन्य अंगों और मस्तिष्क से जुड़ी होती हैं। इस कारण, पैरों की ठंडक केवल पैरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह पूरे शरीर और मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है।
सर्दियों में ठंड, सूखापन और भारीपन वात दोष को बढ़ाते हैं। जब वात असंतुलित होता है, तो नसों में जकड़न, थकान, नींद की कमी और कभी-कभी पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए, आयुर्वेद में पैरों को गर्म और आरामदायक रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
घर पर एक सरल उपाय यह है कि सोने से पहले पैरों को गुनगुने पानी में 5-10 मिनट तक डालें। इसमें सेंधा नमक या तिल/सरसों का तेल मिलाना फायदेमंद होता है। इससे नसों को गर्माहट मिलती है, रक्त संचार बढ़ता है, और शरीर तथा मन दोनों को शांति मिलती है।
पैर धोने के बाद हल्का तेल या घी लगाना भी लाभकारी होता है। यह एड़ियों को फटने से बचाता है और पैरों की त्वचा को नरम बनाता है। यदि थकान या तनाव अधिक हो, तो पानी में 1-2 बूंद नीलगिरी या लैवेंडर का तेल डालें। इसकी सुगंध मस्तिष्क के लिम्बिक सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालती है और मानसिक तनाव को कम करती है। नियमित रूप से ऐसा करने से नींद जल्दी आती है और सर्दियों में पैरों की ठंडक से जुड़ी समस्याएं दूर रहती हैं।
पैरों की देखभाल केवल शरीर को गर्म रखने के लिए नहीं, बल्कि नींद, मानसिक शांति और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। छोटे-छोटे उपाय जैसे गुनगुना पानी, हल्का तेल और सूती मोजे पहनना आपकी रातों को आरामदायक बना सकते हैं और सर्दियों में शरीर और मन को मजबूत रखते हैं।