सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल: स्वास्थ्य पर प्रभाव और डॉक्टरों की सलाह
सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति
दिल्ली पुलिस ने आज सुबह सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय तक भूखे रहने और पानी की कमी के कारण उनकी सेहत में गिरावट आई है। हालांकि, उनकी स्थिति अब स्थिर है और सभी स्वास्थ्य मानक सामान्य हैं। उनकी पत्नी, गीतांजलि जे अंगमो ने स्पष्ट किया है कि बिना उनकी सहमति के उन्हें कोई भी दवा नहीं दी जानी चाहिए।
भूख हड़ताल का प्रभाव
जंतर मंतर पर भूख हड़ताल के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। क्या केवल पानी पीकर कई दिनों तक जीवित रहना संभव है?
सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति का विश्लेषण
अस्पताल के अनुसार, वांगचुक को हल्की कमजोरी और डिहाइड्रेशन की समस्या है। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी सभी वाइटल पैरामीटर सामान्य हैं और उन्हें लगातार निगरानी में रखा जा रहा है। पहले उन्हें इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में इलाज दिया गया, फिर मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया।
डॉक्टरों की सलाह
डॉ. पंकज खटाना, वरिष्ठ डॉक्टर (इंटरनल मेडिसिन), मारेंगो एशिया हॉस्पिटल, गुरुग्राम:-
भूख हड़ताल का शरीर पर गहरा असर पड़ता है। लंबे समय तक भोजन न मिलने पर शरीर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है और बाद में शरीर के ऊतकों को भी तोड़ना शुरू कर देता है।
भूख हड़ताल के दौरान शरीर की प्रतिक्रिया
डॉक्टरों के अनुसार, पहले 24 घंटों में शरीर आखिरी बार खाए गए भोजन और लिवर में जमा ग्लाइकोजन से ऊर्जा प्राप्त करता है। इसके बाद, 2 से 3 दिन में शरीर फैट जलाकर ऊर्जा बनाना शुरू करता है। इस प्रक्रिया में वजन घटने और कमजोरी की समस्याएं हो सकती हैं।
भोजन के पुनः आरंभ करने का खतरा
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के अनुसार, लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक खाना खाना खतरनाक हो सकता है। इस स्थिति में रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, लंबे उपवास के बाद भोजन का पुनः आरंभ हमेशा डॉक्टरों की निगरानी में करना चाहिए।