स्ट्रोक: लक्षण, पहचान और उपचार के तरीके
स्ट्रोक क्या है?
स्ट्रोक एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है या रक्तवाहिका फट जाती है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा संचालित राष्ट्रीय स्ट्रोक रजिस्ट्रि कार्यक्रम के अनुसार, भारत में 14% लोग 45 वर्ष से कम उम्र में स्ट्रोक का सामना कर चुके हैं।
स्ट्रोक के प्रकार
स्ट्रोक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं: इस्केमिक स्ट्रोक, जिसमें रक्त का थक्का मस्तिष्क की रक्तवाहिका को अवरुद्ध कर देता है, और हेमरेजिक स्ट्रोक, जिसमें रक्तवाहिका फटने से मस्तिष्क में रक्तस्राव होता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और खराब आहार जैसे कारक स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ यह जोखिम बढ़ता है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है। नियमित स्वास्थ्य जांच और जोखिम कारकों पर नियंत्रण से स्ट्रोक का खतरा कम किया जा सकता है।
स्ट्रोक की पहचान कैसे करें?
स्ट्रोक की पहचान के लिए FAST सिद्धांत को याद रखना सहायक हो सकता है।
- F – Face (चेहरा): क्या मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा दिखाई देता है?
- A – Arm (बांह): क्या एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन आ गया है?
- S – Speech (बोलना): क्या बोलने में कठिनाई हो रही है?
- T – Time (समय): यदि इनमें से कोई लक्षण दिखे, तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं।
इसके अलावा, अचानक दृष्टि में कमी, संतुलन बिगड़ना, चलने में कठिनाई, या तेज सिरदर्द भी स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। लक्षणों की शुरुआत का समय नोट करना महत्वपूर्ण है।
स्ट्रोक का इलाज और बचाव
स्ट्रोक का इलाज समय पर सही अस्पताल पहुंचने से शुरू होता है। हर मिनट में मस्तिष्क की लाखों तंत्रिका कोशिकाएं नष्ट हो सकती हैं। अस्पताल में CT या MRI जांच की जाती है ताकि यह पता चल सके कि स्ट्रोक का कारण क्या है।
इस्केमिक स्ट्रोक के मरीजों को थक्का घोलने वाली दवा दी जा सकती है, जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक के लिए रक्तचाप नियंत्रण और न्यूरोसर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। फिजियोथेरेपी और स्पीच थेरेपी भी महत्वपूर्ण हैं।
बचाव के लिए, रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना, धूम्रपान छोड़ना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित आहार लेना और पर्याप्त नींद लेना आवश्यक है।