स्वतंत्रता दिवस पर राजनीतिक विवाद: राहुल गांधी और खड़गे की अनुपस्थिति
स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ का जश्न
आज देश स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, और हर जगह तिरंगा गर्व से लहरा रहा है। इस अवसर पर, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए। दोनों नेताओं ने समारोह में बैठने की व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर अपनी असहमति व्यक्त की।
सूत्रों के अनुसार, उनकी नाराज़गी समारोह में प्रोटोकॉल और बैठने की व्यवस्था से संबंधित थी। उनकी पोज़िशन के अनुसार कई बातें सही नहीं थीं, जिसके कारण उन्होंने कार्यक्रम से नाम वापस ले लिया। इससे राजनीतिक चर्चाएँ शुरू हो गईं।
पिछले स्वतंत्रता दिवस पर भी इसी तरह का विवाद हुआ था, जब विपक्ष के नेता को लोकसभा की पिछली पंक्ति में बैठाया गया था। विपक्ष ने इसे अपमानजनक बताया, जबकि रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह ओलंपिक एथलीटों को जगह देने के लिए किया गया था। नियमों के अनुसार, ऐसे राष्ट्रीय आयोजनों में विपक्ष के नेता को आगे की पंक्ति में स्थान दिया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी का भाषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 13वीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया और देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की शक्ति से देश विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है, और भविष्य में विकास की गति और तेज़ होगी।
विकास और सुरक्षा पर चर्चा
अपने भाषण में, पीएम मोदी ने देश के विकास, युवाओं के भविष्य और सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने "मेंटल नक्सलियों" का भी उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा कि बंदूक चलाने वाले नक्सली समाप्त होने के कगार पर हैं, लेकिन "मेंटल नक्सली" अभी भी मौके की तलाश में हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संसद के मॉनसून सत्र के बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच राजनीतिक विभाजन अभी भी कम नहीं हुआ है।