हाई ब्लड प्रेशर: युवाओं में बढ़ती समस्या और इसके गंभीर प्रभाव
हाई ब्लड प्रेशर के बढ़ते मामले
चंडीगढ़, 17 मई। देश के शहरी क्षेत्रों, विशेषकर दिल्ली-NCR में, खराब जीवनशैली के कारण हाई ब्लड प्रेशर (हाई बीपी) के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। अक्सर लोग थोड़ी सी बीपी बढ़ने पर उसे सामान्य मानकर दवा या आवश्यक जांच को टाल देते हैं। ऑफिस का तनाव, बाहर का अस्वास्थ्यकर भोजन और शारीरिक गतिविधियों की कमी युवाओं को तेजी से बीमार बना रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बीपी का सीधा संबंध दिल और किडनी से होता है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
किडनी पर हाई बीपी का प्रभाव
दिल्ली के सीके बिड़ला हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अमित प्रकाश सिंह ने इस बीमारी के कारणों पर प्रकाश डाला है। उनका कहना है कि लंबे समय तक हाई बीपी रहने से किडनी की छोटी नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता में कमी आ सकती है। किडनी हमारे शरीर में एक फ़िल्टर की तरह काम करती है, जो खून से गंदगी और अतिरिक्त पानी को छानकर पेशाब के माध्यम से बाहर निकालती है। जब ब्लड प्रेशर लगातार उच्च रहता है, तो इन नाजुक नलिकाओं पर दबाव बढ़ता है और वे सिकुड़ने लगती हैं।
बिना लक्षण के बढ़ती बीमारी
नेफ्रोप्लस के सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. निश्चय बी. के अनुसार, हाई बीपी और किडनी की बीमारी अक्सर बिना लक्षण के बढ़ती हैं। कई लोगों को तब पता चलता है जब किडनी काफी कमजोर हो चुकी होती है। इसी कारण इसे चिकित्सा विज्ञान में 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। शुरुआत में मरीज सामान्य महसूस करता है, लेकिन अंदर ही अंदर गंदगी शरीर में जमा होने लगती है। जब बीमारी गंभीर हो जाती है, तब पैरों में सूजन, जल्दी थकान, कमजोरी, भूख न लगना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसे लक्षण उभरते हैं।
युवाओं में बढ़ता खतरा
द्वारका स्थित आकाश हेल्थकेयर मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. अनुपम रॉय ने युवाओं में बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि खराब जीवनशैली और तनाव के कारण आजकल कम उम्र में भी हाई बीपी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज है, वजन अधिक है या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास है, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ज्यादा नमक, जंक फूड और धूम्रपान इस समस्या को और बढ़ाते हैं।
डायलिसिस से बचने के उपाय
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि हाई बीपी और किडनी का संबंध बहुत गहरा और खतरनाक है। खराब किडनी शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगाड़ देती है, जिससे ब्लड प्रेशर और बढ़ जाता है। यह एक दुष्चक्र है जो अंततः मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की स्थिति में धकेल देता है। इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि लोग डॉक्टर द्वारा सुझाई गई बीपी की दवाओं को नियमित रूप से लें। नियमित जांच, खाने में नमक की कमी, रोजाना चलना और पर्याप्त पानी पीकर इस जानलेवा खतरे से बचा जा सकता है।