हिमाचल प्रदेश की प्रगति के लिए कार्य संस्कृति का महत्व: शिव प्रताप शुक्ल
राज्यपाल का विकास पर जोर
शिमला - हिमाचल प्रदेश के निवर्तमान राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा है कि राज्य के समग्र विकास के लिए एक जिम्मेदार कार्य संस्कृति का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि केवल एक मजबूत कार्य संस्कृति अपनाने से ही राज्य प्रगति कर सकता है।
शुक्ला ने शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि विकास के मामले में पड़ोसी राज्य उत्तराखंड हिमाचल से आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा, "हिमाचल को कार्य संस्कृति के विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यदि समाज, सरकार और राजनीतिक दल सकारात्मक मानसिकता के साथ सहयोग नहीं करते हैं, तो राज्य विकास की दौड़ में पीछे रह जाएगा।"
राज्यपाल ने अपने तीन साल के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने राज्य के लोगों और उनकी परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन संभावनाओं को साकार करने के लिए उचित दिशा और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो राज्य प्रगति में पिछड़ जाएगा।
शुक्ला ने मीडिया की भूमिका की सराहना की और कहा कि उनके द्वारा शुरू किए गए 'नशा मुक्त हिमाचल और टीबी मुक्त' अभियान में मीडिया ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि मीडिया इस पहल में सबसे आगे रहा है।
राज्यपाल ने मीडिया से सामाजिक मुद्दों को उजागर करने और उन्हें गति देने की अपील की, ताकि जागरूकता बढ़ सके और समाज में सकारात्मक बदलाव आ सके। टीबी से संबंधित जागरूकता अभियान 'टीबी मुक्त भारत' के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश भर में टीबी मुक्त बनाने का अभियान चल रहा है। हालांकि, पिछले साल राज्य से टीबी मुक्त होने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज को संवेदनशील बनाने में मीडिया की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने राजनीतिक दलों को शासन पर ध्यान केंद्रित करने और जनता के कल्याण के लिए राजनीति करने की सलाह दी।
राज्यपाल ने केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों पर भी चर्चा की और कहा कि दोनों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने जीएसटी का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई की, लेकिन अब समय आ गया है कि राज्य अपने संसाधनों को मजबूत करें।
राज्यपाल ने राजभवन और राज्य सरकार के बीच कथित टकराव की चर्चाओं पर कहा कि दोनों के बीच कोई विवाद नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा राजभवन को भेजे गए मामलों का निपटारा संवैधानिक ढांचे के भीतर किया जाता है।
शुक्ला ने अनाथ और वंचित बच्चों के विकास के लिए हिमाचल प्रदेश सुखाश्रय विधेयक 2023 का उल्लेख किया और कहा कि इसमें देरी का आरोप गलत है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल के मुद्दों पर भी टिप्पणी की और कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान राजनीति से ऊपर होना चाहिए।