‘वाई-ब्रेक’: ऑफिस में फिट रहने का सरल उपाय
काम के दौरान स्वास्थ्य बनाए रखने का उपाय
नई दिल्ली: आजकल की तेज़ रफ्तार जिंदगी और लंबे ऑफिस के घंटों के कारण कर्मचारियों को कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लगातार एक ही जगह बैठने से गर्दन, पीठ, कंधों और पैरों में दर्द के साथ-साथ तनाव और चिंता भी बढ़ जाती है। इस समस्या का समाधान आयुष मंत्रालय द्वारा पेश किया गया ‘वाई-ब्रेक’ है, जो कर्मचारियों के लिए एक सरल और प्रभावी उपाय साबित हो रहा है।
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय ‘वाई-ब्रेक’ के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। यह एक छोटा लेकिन अत्यंत उपयोगी योग ब्रेक है, जिसे कर्मचारी अपनी सीट पर बैठे-बैठे कर सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष स्थान पर जाने की आवश्यकता नहीं होती। यह कुछ मिनटों का ब्रेक दिनभर की थकान को दूर कर कर्मचारियों को तरोताजा और स्वस्थ रखने में मदद करता है। लगातार एक ही मुद्रा में बैठने से शरीर का पॉश्चर बिगड़ जाता है, जिससे कमरदर्द, गर्दन में जकड़न, कंधों में दर्द और घुटनों की समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ‘वाई-ब्रेक’ की सरल मूवमेंट्स इन समस्याओं को कम करने और सही पॉश्चर बनाए रखने में मदद करती हैं।
आयुष मंत्रालय ने ‘वाई-ब्रेक’ की विधि और वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध कराए हैं। मंत्रालय का कहना है कि ऑफिस में काम करने वाले हर कर्मचारी को दिन में दो-तीन बार यह छोटा ब्रेक लेना चाहिए। नियमित रूप से ‘वाई-ब्रेक’ करने से कर्मचारियों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है, कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनता है और उत्पादकता में वृद्धि होती है।
लगातार बैठे रहने से शरीर में चर्बी जमा होने लगती है, जो मोटापे का कारण बन सकती है। नियमित ‘वाई-ब्रेक’ से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा, ‘वाई-ब्रेक’ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है। यह तनाव, चिंता और मानसिक थकान को कम करता है। इससे कर्मचारियों की एकाग्रता बढ़ती है, कार्यक्षमता में सुधार होता है और वे अधिक उत्साह के साथ काम कर पाते हैं।
‘वाई-ब्रेक’ में कुछ सरल योगासन, प्राणायाम और ध्यान शामिल हैं। इनमें ताड़ासन (बैठे-बैठे शरीर को खींचना), कटिचक्रासन (कमर घुमाना), ग्रीवा संचालन (गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग) जैसे आसन शामिल हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ‘वाई-ब्रेक’ कैसे करें? इसके लिए कुर्सी पर सीधे बैठें, पीठ को सीधा रखें और हाथों को घुटनों पर रखें। पेट को अंदर की ओर खींचें और फिर ढीला छोड़ें। गर्दन को धीरे-धीरे दाएं-बाएं घुमाएं। पैरों को एक-दूसरे पर रखकर फैलाएं और गहरी सांस लें। नाड़ी शोधन प्राणायाम और सरल ध्यान भी इसमें शामिल किया जा सकता है। इन अभ्यासों से रक्त संचार बेहतर होता है, मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और मन शांत रहता है।