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UPSC ने भर्ती परीक्षाओं में फेस ऑथेंटिकेशन लागू किया

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भर्ती परीक्षाओं में फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए उठाया गया है। सभी उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर चेहरे की पहचान तकनीक से सत्यापित किया जाएगा, जिससे फर्जी उम्मीदवारों और नकल जैसी गतिविधियों पर रोक लगेगी। UPSC का मानना है कि इससे परीक्षा की निष्पक्षता बनी रहेगी और योग्य उम्मीदवारों का चयन अधिक विश्वसनीय तरीके से होगा।
 

UPSC का नया फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम


संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब सभी UPSC द्वारा आयोजित परीक्षाओं में उम्मीदवारों का चेहरा पहचानने की प्रक्रिया लागू की जाएगी। इसका अर्थ है कि परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के बाद, उम्मीदवार की पहचान चेहरे की पहचान तकनीक के माध्यम से सत्यापित की जाएगी।


परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा में वृद्धि

UPSC के अधिकारियों के अनुसार, यह कदम परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को और अधिक मजबूत करेगा। आयोग की वेबसाइट पर जारी सूचना में बताया गया है कि सभी उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे फर्जी उम्मीदवारों, पहचान बदलकर परीक्षा देने और नकल जैसी गतिविधियों पर रोक लगेगी।


UPSC द्वारा आयोजित प्रमुख परीक्षाएं

UPSC देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाएं आयोजित करता है, जिनमें सिविल सेवा परीक्षा शामिल है, जिसके माध्यम से IAS, IFS और IPS जैसे शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों का चयन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, NDA, CDS और अन्य केंद्रीय सेवाओं की भर्ती परीक्षाएं भी UPSC द्वारा कराई जाती हैं।


पायलट प्रोजेक्ट की सफलता

इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले, UPSC ने इसका परीक्षण किया था। सितंबर 2025 में आयोजित NDA-II, NA-II और CDS-II परीक्षाओं के दौरान, गुरुग्राम के कुछ परीक्षा केंद्रों पर फेस ऑथेंटिकेशन का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था।


AI तकनीक का उपयोग

इस पायलट प्रोजेक्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का उपयोग किया गया। उम्मीदवार के चेहरे की लाइव तस्वीर को उनके आवेदन फॉर्म में लगी फोटो से डिजिटल रूप से मिलाया गया, जिससे पहचान की पुष्टि तेजी और सटीकता से हो सकी।


सत्यापन की गति

UPSC के अध्यक्ष अजय कुमार के अनुसार, इस नई तकनीक से हर उम्मीदवार का सत्यापन औसतन केवल 8 से 10 सेकंड में हो गया। इससे परीक्षा केंद्रों पर लंबी कतारें कम हुईं और प्रवेश प्रक्रिया भी सरल हो गई।


भविष्य में पूर्ण कार्यान्वयन

अब UPSC इस फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली को सभी भर्ती परीक्षाओं में लागू करने की योजना बना रहा है। आयोग का मानना है कि इससे परीक्षा की निष्पक्षता बनी रहेगी और योग्य उम्मीदवारों का चयन और अधिक विश्वसनीय तरीके से किया जा सकेगा।