अपूर्वा वर्मा: मेहनत और लगन से बनीं IAS, चंपारण से दिल्ली तक का सफर
सपनों की उड़ान
पश्चिमी चंपारण: अपूर्वा वर्मा ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और सपने देखने वाले कभी हार नहीं मानते। बिहार के छोटे से गांव सुगौली से निकलकर, वह दिल्ली पुलिस में ACP बन गईं। उन्होंने एक ओर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली और दूसरी ओर UPSC की कठिन परीक्षा की तैयारी जारी रखी। पुलिस की ड्यूटी, फील्ड वर्क और लगातार पढ़ाई का यह सफर उन्हें UPSC 2025 में 42वीं रैंक दिलाने में सफल रहा। अब वह IAS बनकर देश की सेवा में नई ऊंचाइयों को छूने वाली हैं। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि सही दिशा और मेहनत से कुछ भी असंभव नहीं है।
चंपारण से दिल्ली तक का सफर
अपूर्वा वर्मा पश्चिमी चंपारण के नरकटियागंज थाना क्षेत्र के सुगौली गांव की निवासी हैं। बचपन से ही पढ़ाई में तेज, उन्होंने DPS बोकारो से इंटरमीडिएट किया और फिर NIT से इंजीनियरिंग की। इंजीनियरिंग के बाद, उन्होंने सिविल सेवा का सपना देखा। 2022 में UPSC पास कर IPS बनीं और दिल्ली पुलिस में ACP के रूप में कार्यभार संभाला। लेकिन IAS बनने की चाहत ने उन्हें नौकरी छोड़ने के बिना तैयारी जारी रखने की प्रेरणा दी।
नौकरी और पढ़ाई का संतुलन
ACP की जिम्मेदारी आसान नहीं होती- फील्ड विजिट, केस हैंडलिंग और टीम मैनेजमेंट सभी कुछ करना पड़ता है। इसके बावजूद, अपूर्वा ने पढ़ाई के लिए समय निकाला। ड्यूटी के बीच छोटे-छोटे ब्रेक में वीडियो लेक्चर सुनतीं और नोट्स रिवाइज करतीं। उन्होंने बताया कि पुलिस सेवा ने उन्हें तार्किक सोच, दबाव में काम करने और समस्या सुलझाने की कला सिखाई। यही स्किल्स UPSC मेन्स और इंटरव्यू में उनके काम आईं। मेहनत का फल यह रहा कि छठे प्रयास में सफलता मिली।
इंटरव्यू में आत्मविश्वास
अपूर्वा ने कहा कि इस बार उनका पूरा ध्यान परीक्षा पर था। एग्जाम अच्छे गए और इंटरव्यू में भी उन्होंने आत्मविश्वास से जवाब दिए। पुलिस बैकग्राउंड के कारण, वह रियल लाइफ उदाहरण आसानी से दे पाईं। वह शांत रहकर तैयारी करती थीं और तनाव नहीं लेती थीं। यही कारण रहा कि अंतिम दौर में उन्हें अच्छा स्कोर मिला। रैंक 42 के साथ, अब वह IAS कैडर में जाएंगी और देश की नीति निर्माण में योगदान देंगी।
शिक्षा और अनुशासन
NIT की इंजीनियरिंग डिग्री ने उन्हें एनालिटिकल माइंड दिया, जबकि स्कूल और कॉलेज के अनुशासित जीवन ने धैर्य सिखाया। 2022 में IPS बनने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। अपूर्वा मानती हैं कि हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है। अपनी ताकत पहचानो, कमजोरियों पर काम करो और रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ो। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
प्रेरणा का संदेश
अपूर्वा की सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी जो नौकरी, पढ़ाई या पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच UPSC की तैयारी कर रहे हैं। वह कहती हैं कि सफलता का कोई फॉर्मूला नहीं है, बस लगातार प्रयास की आवश्यकता है। मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। IAS बनकर, वह न केवल अपने गांव, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेंगी। चंपारण की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि सपने बड़े हों तो मेहनत भी बड़ी होनी चाहिए।